कोलकाता : भारतीय फुटबॉल के ऐतिहासिक और पारंपरिक क्लबों में से एक 'मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब' (Mohammedan Sporting Club) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। आम जनता विकास पार्टी के संस्थापक और नौदा (Nawda) निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) को क्लब का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
शुक्रवार को क्लब के तत्कालीन अध्यक्ष अमीरउद्दीन बॉबी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके तुरंत बाद क्लब प्रबंधन ने हुमायूं कबीर को इस शीर्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी। नए अध्यक्ष के सम्मान में शनिवार दोपहर 2 बजे क्लब की ओर से एक भव्य संवर्धन (स्वागत) समारोह का भी आयोजन किया गया है।
समर्थकों के भारी दबाव के बाद बॉबी ने छोड़ा पद
पिछले कुछ दिनों से मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के सदस्यों और समर्थकों का एक बड़ा वर्ग तत्कालीन अध्यक्ष अमीरउद्दीन बॉबी के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा था। आखिरकार इस चौतरफा दबाव के आगे झुकते हुए बॉबी ने अपना पद छोड़ दिया।
क्लब सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भले ही अध्यक्ष का चेहरा बदल गया है, लेकिन क्लब की बाकी कार्यकारी समितियां (Committees) फिलहाल यथावत रहेंगी। अगले एक महीने तक नए अध्यक्ष हुमायूं कबीर के नेतृत्व में क्लब के कामकाज, फैसलों और सबसे महत्वपूर्ण—वित्तीय स्थिति में आने वाले सुधारों की समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद ही आगे की रणनीति तय होगी।
13 करोड़ का कर्ज और वित्तीय संकट से जूझ रहा है क्लब
ब्लैक एंड व्हाइट ब्रिगेड (सफेद-कालो) लंबे समय से भीषण आर्थिक तंगी से गुजर रही है। हालिया विधानसभा चुनावों के बाद क्लब को कॉर्पोरेट और वित्तीय संकट से उबारने की मांग और तेज हो गई थी।
आर्थिक मोर्चे पर क्लब की हालत का अंदाजा इन बिंदुओं से लगाया जा सकता है:
वर्तमान में मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब पर करीब 13 करोड़ रुपये के कर्ज का भारी बोझ है।
पैसों की भारी किल्लत के कारण अगले सीजन के लिए नई टीम के गठन (Team Formation) की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
इस वित्तीय गतिरोध को तोड़ने के लिए क्लब अधिकारियों ने हाल ही में आईएसएफ (ISF) विधायक नौशाद सिद्दीकी और हुमायूं कबीर से मदद की गुहार लगाई थी और नया स्पॉन्सर (Sponsor) ढूंढने में सहयोग मांगा था।
कुछ महीने पहले विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया था कि कोलकाता के अन्य बड़े क्लबों (जैसे मोहन बागान और ईस्ट बंगाल) की तुलना में मोहम्मडन स्पोर्टिंग को पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिली। दूसरी तरफ, हुमायूं कबीर ने अध्यक्ष बनने से पहले ही क्लब के वित्तीय गतिरोध को दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठाने का आश्वासन दिया था।
खराब प्रदर्शन और आईएसएल (ISL) से डिमोशन का दंश
मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के लिए पिछला सीजन किसी बुरे सपने जैसा रहा। इस सीजन में क्लब को दूसरी बार देश की शीर्ष फुटबॉल लीग यानी इंडियन सुपर लीग (ISL) में खेलने का सुनहरा मौका मिला था। लेकिन फीफा के 'ट्रांसफर बैन' (खिलाड़ियों की खरीद-बिक्री पर रोक) और फंड की कमी के कारण क्लब एक मजबूत और संतुलित टीम तैयार करने में नाकाम रहा।
खराब प्रबंधन और कमजोर टीम के कारण पूरे सीजन में क्लब का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। आखिरकार, पॉइंट्स टेबल (अंक तालिका) में सबसे निचले पायदान पर रहने के कारण मोहम्मडन स्पोर्टिंग को आईएसएल से अवनमन (Relegation) का सामना करना पड़ा।
अब देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक रूप से रसूखदार हुमायूं कबीर के हाथों में कमान आने के बाद, क्या यह ऐतिहासिक क्लब 13 करोड़ के कर्ज से मुक्ति पाकर और एक नया स्पॉन्सर ढूंढकर भारतीय फुटबॉल के शीर्ष स्तर पर दोबारा वापसी कर पाता है या नहीं।