कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले में एक नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ सामने आया है। कथित 'मिडलमैन' तपस मंडल की गिरफ्तारी के बाद दिए गए उनके बयान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पैसे के लेन-देन की बात स्वीकार करने के साथ ही तपस मंडल ने अभिषेक बनर्जी समेत कई राजनीतिक नेताओं के नाम लिए, जिनमें सायनी घोष का नाम भी शामिल है।

सायनी घोष को लेकर किया दावा
तपस मंडल ने दावा किया कि सायनी घोष पर कुंतल घोष काफी पैसे खर्च करता था। इसके अलावा उन्होंने सायनी को लेकर कई अन्य विवादित टिप्पणियां भी कीं। इन बयानों के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
सायनी घोष ने भेजा कानूनी नोटिस
अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार और झूठा बताते हुए सायनी घोष ने तपस मंडल को कानूनी नोटिस भेजा है। उनका कहना है कि बिना किसी सबूत के उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई है और वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगी।
'जनप्रतिनिधि होने के नाते जवाबदेह हूं'
सायनी घोष ने कहा कि पहले भी उन्होंने इस तरह की टिप्पणियों को नजरअंदाज किया था, लेकिन अब वह एक जनप्रतिनिधि हैं और जादवपुर लोकसभा क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेह हैं। इसलिए वह नहीं चाहतीं कि लोगों के मन में उनके प्रति किसी तरह का संदेह पैदा हो।
'रिपीट ऑफेंडर' बताते हुए दी कोर्ट जाने की चेतावनी
सायनी घोष ने तपस मंडल को 'रिपीट ऑफेंडर' बताते हुए कहा कि किसी के खिलाफ बिना किसी आधार और सबूत के आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि कानूनी नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वह कानून के तहत आगे की कार्रवाई करेंगी। सायनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आई विल सी हिम इन कोर्ट।"