नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली में आगामी सोमवार (8 जून) को होने वाली विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक के दिन ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बड़ी टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी टीएमसी के कई सांसद बगावत का रास्ता चुन सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन यह सब होने का दावा किया जा रहा है, उसी दिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी एक सरकारी कार्यक्रम के सिलसिले में दिल्ली में होंगे। वहीं दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी देश की राजधानी में मौजूद रहेंगे।
लोकसभा सांसदों की बैठक और नई रणनीति?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की स्क्रिप्ट बहुत सोच-समझकर तैयार की गई है। दावों के अनुसार:
शनिवार: टीएमसी के एक लोकसभा सांसद की केंद्र के एक महत्वपूर्ण मंत्री के साथ गुप्त बैठक हो सकती है।
रविवार: तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 लोकसभा सांसदों की एक बड़ी बैठक होने की संभावना है।
सोमवार: सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक हस्ताक्षरित (Signed) पत्र सौंपा जा सकता है।
इस पत्र में लोकसभा में टीएमसी के नए नेता के रूप में काकली घोष दस्तिदार के नाम का प्रस्ताव रखे जाने की अटकलें हैं। हालांकि, काकली घोष दस्तिदार ने खुद इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:
"पार्टी के खिलाफ असंतोष हो सकता है और इसे मैंने खुलकर व्यक्त भी किया है। लेकिन जो बातें (टूट और नए नेता की) कही जा रही हैं, उनके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं पूरी तरह अंधेरे में हूँ।"
राज्यसभा में भी बगावत की आहट, सुकेंदु शेखर राय के बदले सुर
लोकसभा के अलावा राज्यसभा में भी टीएमसी को बड़ा झटका लग सकता है। इस विवाद के केंद्र में पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुकेंदु शेखर राय का नाम सामने आ रहा है। सुकेंदु शेखर ने एक बेहद ही रहस्यमयी और दार्शनिक अंदाज में बयान देकर इन अटकलों को और हवा दे दी है।
उन्होंने कहा: "जब गंगा में ज्वार आता है तो पानी आगे बढ़ता है, और भाटे के समय पानी पीछे हट जाता है। ज्वार का पानी चले जाने के बाद वहां सिर्फ कीचड़ रह जाता है। भाटे का खिंचाव कब आएगा, यह कौन कह सकता है!"
जब उनसे पूछा गया कि इस 'भाटे के खिंचाव' में उनकी क्या भूमिका होगी, तो उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा: "मैंने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। लेकिन मानसिक रूप से मैं पार्टी में नहीं हूँ, केवल शारीरिक रूप से हूँ। मेरे सामने तीन रास्ते खुले हैं—जैसे हूँ वैसे ही बने रहना, पार्टी छोड़ देना या राजनीति से संन्यास ले लेना। जो भी सबसे बेहतर विकल्प होगा, सही समय पर मैं वही फैसला करूँगा।"
बाबुल सुप्रियो और महुआ मोइत्रा ने संभाला मोर्चा
टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान के बीच पार्टी के अन्य नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बागी सुर अपनाने वाले नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा:
"आपको अपनी पार्टी के खिलाफ रुख अपनाने का पूरा अधिकार है। मैंने भी ऐसा किया है। लेकिन अगर आप उस फैसले का सम्मान करना चाहते हैं, तो आपको सांसद या विधायक पद से भी इस्तीफा दे देना चाहिए। क्योंकि आप पार्टी के प्रतीक (सिंबल), नेतृत्व और बैनर के दम पर चुनाव जीते थे।"
वहीं, लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने पूरी तरह से ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की है। महुआ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि तृणमूल कांग्रेस अपनी सर्वोच्च नेता के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी और जो नेता व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी विरोधी रुख अपना रहे हैं, उन्हें जनता सही समय पर करारा जवाब देगी।
आगामी 8 जून का दिन अब सिर्फ दिल्ली में होने वाली विपक्षी एकजुटता (INDIA Alliance) की बैठक के लिए ही नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भविष्य और पश्चिम बंगाल की राजनीति के नए समीकरणों के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।