कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी अंदरूनी कलह और बगावत अब पूरी तरह से सतह पर आ चुकी है। कोलकाता नगर निगम और विभिन्न जिला परिषदों में जारी इस्तीफों के दौर के बीच, अब टीएमसी की बेहद वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) ने पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए काकोली घोष दस्तीदार ने अपना इस्तीफा टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेज दिया है। अपने इस कदम से उन्होंने सीधे तौर पर श्रीरामपुर से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को निशाने पर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड और राशन भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों पर भी पार्टी नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है।
"जहां महिला सांसद का अपमान हो, वहां पद पर रहने का मतलब नहीं"
सुब्रत बख्शी को भेजे गए अपने पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने लिखा, "मैं अत्यंत दुख और चिंता के साथ सूचित कर रही हूं कि मैं ऑल इंडिया तृणमूल महिला कांग्रेस के चेयरपर्सन पद सहित पार्टी के अन्य सभी सांगठनिक पदों, कमेटियों और जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रही हूं।"
पार्टी के भीतर महिलाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बिना नाम लिए कल्याण बनर्जी पर निशाना साधा और लिखा:
इस्तीफे की मुख्य वजह:
"जिस पद पर रहते हुए एक महिला सांसद के प्रति अपनी ही पार्टी के एक अन्य 'अशिक्षित और अभद्र' सांसद के अश्लील व अमर्यादित व्यवहार को रोका न जा सके, और जहां इस विषय पर शीर्ष नेतृत्व का कोई सहयोग या सहानुभूति न मिले, वैसे पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।"
सुवेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होने के बाद बढ़ा सस्पेंस
गौरतलब है कि इस इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को काकोली घोष दस्तीदार कल्याणी में आयोजित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) की हाई-लेवल प्रशासनिक बैठक में शामिल हुई थीं। तभी से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, उस समय उन्होंने कहा था कि यह एक प्रशासनिक बैठक थी और निमंत्रण मिलने के कारण वह इसमें शामिल हुईं। लेकिन बुधवार को अचानक सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद उनके पाला बदलने (भाजपा में शामिल होने) की अटकलें अब बेहद तेज हो गई हैं।
हार के बाद से ही चल रही थी अनबन, आईपैक पर भी फोड़ा था बम
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी नेतृत्व के बीच दरार तभी आ गई थी जब 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी की भारी शिकस्त के बाद उन्हें लोकसभा में पार्टी के 'चीफ व्हिप' (मुख्य सचेतक) के पद से हटा दिया गया था।
पद से हटाए जाने के तुरंत बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई विस्फोटक पोस्ट किए थे। उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति संभालने वाली एजेंसी आईपैक (I-PAC) और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बारासात जिला अध्यक्ष के पद से भी इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, अपने ताजा पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे फिलहाल एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम करती रहेंगी, लेकिन पत्र के लहजे से यह साफ है कि टीएमसी में अब उनके लिए रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं।