कोलकाता: कोलकाता के एंटाली निर्वाचन क्षेत्र से टीएमसी विधायक संदीपन साहा के आवास के सामने पिछले दिनों हुए भारी विरोध प्रदर्शन के बाद अब सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आक्रामक रुख अपना लिया है। बुधवार को टीएमसी संसदीय दल द्वारा आपत्ति जताए जाने और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DG) से मिलने के फैसले के बाद, शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल संदीपन साहा के घर पहुंचा।
टीएमसी नेताओं ने विधायक और उनके परिवार से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया और पार्टी की ओर से उन्हें हर संभव राजनीतिक व व्यक्तिगत सहयोग का आश्वासन दिया। इस बीच, गुरुवार को संदीपन साहा के घर के बाहर हुए इस हंगामे को लेकर न्यू मार्केट थाने में एक लिखित शिकायत भी दर्ज कराई जा चुकी है।
"व्यक्तिगत दायरे में दखल लोकतांत्रिक संस्कृति के खिलाफ" — ऋतब्रत बनर्जी
विधायक संदीपन साहा के आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने बीजेपी का नाम लिए बिना उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
"लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार हर किसी को है। लेकिन इस अधिकार की आड़ में यदि किसी व्यक्ति या उसके परिवार के निजी दायरे (Personal Space) में दखल दिया जाए या अशांति पैदा करने की कोशिश की जाए, तो इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
ऋतब्रत ने आगे कहा कि राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी के घर के सामने जाकर ऐसा हिंसक माहौल बनाना बंगाल की लोकतांत्रिक संस्कृति के खिलाफ है। गुरुवार की घटना ने विरोध की सभी सीमाओं को पार कर दिया है, जो बेहद चिंताजनक है। संदीपन साहा के पिता और पूर्व विधायक स्वर्णकमल साहा ने भी इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और अशांति फैलाने की सोची-समझी साजिश करार दिया।
प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप: 'एंटाली में चलता है पिता-पुत्र का सिंडिकेट राज'
दूसरी तरफ, संदीपन साहा के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों के एक बड़े वर्ग का आरोप बिल्कुल अलग और बेहद गंभीर है।
प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों का दावा है:
1. सिंडिकेट और भ्रष्टाचार: विधायक संदीपन साहा और उनके पिता स्वर्णकमल साहा ने लंबे समय से एंटाली इलाके में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार और 'सिंडिकेट राज' का साम्राज्य खड़ा कर रखा है।
2. जबरन उगाही (तोलाबाजी): स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में किसी भी नए मकान या फ्लैट के निर्माण, जमीन के सौदों और हर छोटे-बड़े विकास कार्य के लिए इस पिता-पुत्र की जोड़ी को मोटी रकम (तोलाबाज़ी) देने के लिए मजबूर किया जाता था।
3. पार्षद के समय से बढ़ा प्रभाव: निवासियों के मुताबिक, संदीपन साहा जब स्थानीय काउंसलर (पार्षद) थे, तभी से इलाके में उनका प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ा और कई असामाजिक गतिविधियों की शुरुआत हुई। राज्य में हुए प्रशासनिक बदलाव और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े संदेश के बाद अब जनता का यह दबा हुआ गुस्सा खुलकर सड़कों पर सामने आ रहा है।
एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस इस पूरी घटना को व्यक्तिगत हमला और लोकतंत्र के लिए खतरा बताकर प्रशासन से त्वरित व कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं विपक्षी खेमा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ आम जनता का स्वतःस्फूर्त आक्रोश बता रहा है। न्यू मार्केट थाना पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में पुलिसिया कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।