नई दिल्ली/कोलकाता: लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीति में एक बेहद नाटकीय और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने इतिहास के सबसे गहरे संगठनात्मक संकट से गुजर रही है। राज्य विधानसभा में विधायकों की बगावत के बाद अब दिल्ली में टीएमसी सांसदों के एक बड़े धड़े ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है।
अत्यंत विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बीते 18 मई को लोकसभा स्पीकर के कार्यालय में कुल 20 बागी सांसदों की सूची भेजी गई थी, जिसमें से 19 सांसदों के नामों की पुष्टि हो चुकी है। इन सांसदों ने एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर स्पष्ट किया है कि वे टीएमसी नेतृत्व से दूरी बनाना चाहते हैं और संसद में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जुड़ने के इच्छुक हैं। 1998 में स्थापना के बाद से ममता बनर्जी की पार्टी के लिए यह अस्तित्व का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।
इन 19 बागी सांसदों के नामों की हुई पुष्टि
संसद के गलियारों में हलचल मचाने वाली इस सूची में टीएमसी के कई कद्दावर नेताओं, पूर्व अभिनेताओं और नए चेहरों के नाम शामिल हैं:
1. काकली घोष दस्तीदार (नेतृत्वकर्ता)
2. शताब्दी रॉय
3. बापी हलदार
4. डॉ. शर्मिला सरकार
5. प्रसून बनर्जी
6. जगदीश वर्मा बसुनिया
7. असित चक्रवर्ती
8. रचना बनर्जी
9. सायोनी घोष
10. खलीलुर रहमान
11. अबू ताहेर खान
12. यूसुफ पठान
13. मिताली बाग
14. माला रॉय
15. कालीपद सोरेन
16. दीपक अधिकारी (देव)
17. जून मालिया
18. पार्थ भौमिक
(नोट: सूची में शामिल 19वें नाम को लेकर संशय और दावों का दौर जारी है)
बागी खेमे में दरार? जयनगर की सांसद प्रतिमा मंडल ने दावों को नकारा
इस महा-बगावत की खबरें सामने आते ही बागी खेमे में दरार पड़ने के संकेत भी मिलने लगे हैं। सांसद काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले इस बागी समूह में जयनगर की टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल का नाम होने का भी दावा किया जा रहा था। हालांकि, प्रतिमा मंडल ने इस खबर पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बागी गुट का हिस्सा होने से साफ इनकार कर दिया है।
कोलकाता में मौजूद प्रतिमा मंडल ने इसे "पूरी तरह झूठ" करार देते हुए कहा: "यह खबर पूरी तरह से निराधार है। मैं कोलकाता में हूं और दिल्ली जाकर किसी से नहीं मिली। 4 जून को दिल्ली में मेरी 'एस्टीमेट्स कमेटी' की बैठक थी, जिसके बाद मैं तुरंत कोलकाता लौट आई थी। जो लोग यह अफवाह फैला रहे हैं, मैं उन्हें चुनौती देती हूं कि वे सांसदों के हस्ताक्षर वाला वह मूल पत्र सार्वजनिक क्यों नहीं करते? दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।"
हालांकि, प्रतिमा मंडल ने बागी गुट में शामिल होने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने राज्य में टीएमसी की हार को लेकर आत्ममंथन की बात जरूर स्वीकारी। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से पार्टी से कुछ गलतियां हुई थीं, जिसके कारण जनता ने टीएमसी का समर्थन नहीं किया और पार्टी सत्ता में नहीं आ सकी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि बागी गुट ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन उनकी कार्ययोजना "उचित" न लगने के कारण उन्होंने प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
विधानसभा से संसद तक फैली बगावत की आग
टीएमसी के भीतर यह उथल-पुथल इस सप्ताह की शुरुआत में तब सार्वजनिक हुई, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के 58 विधायकों (बागी खेमे का दावा है कि अब यह संख्या 64 हो चुकी है) ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर दिया। इन विधायकों ने आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चटर्जी के बजाय पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में खुला समर्थन दे दिया था।
विधानसभा के इस झटके से पार्टी अभी उबर भी नहीं पाई थी कि दिल्ली में 19 सांसदों के इस कदम ने टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। अब यह लड़ाई सिर्फ पार्टी के भीतर मतभेदों की नहीं, बल्कि संसद और विधानसभा में संख्या बल, संगठनात्मक नियंत्रण और राजनीतिक वैधता को बचाने के महायुद्ध में तब्दील हो चुकी है।