नई दिल्ली: विपक्षी INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और संभावित टूट की अटकलों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। दिल्ली में एक ओर विपक्षी दलों की बैठक चल रही थी, वहीं दूसरी ओर तृणमूल के कुछ असंतुष्ट सांसदों की अलग बैठक ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई अहम बैठक
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर तृणमूल कांग्रेस के कई बागी और असंतुष्ट सांसदों ने बैठक की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसद शामिल हुए, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी ने बढ़ाई राजनीतिक अटकलें
बैठक को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की कथित मौजूदगी को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि वह भी इस बैठक में शामिल हुए थे और दोपहर करीब 2 बजे बैठक समाप्त होने के बाद वहां से निकले। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
ममता बनर्जी की मौजूदगी के बीच बढ़ा सियासी महत्व
दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय हुई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं दिल्ली में मौजूद थीं और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में INDIA गठबंधन की बैठक में हिस्सा ले रही थीं। ऐसे में तृणमूल सांसदों की अलग बैठक को राजनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे के बाद तेज हुई चर्चा
हाल ही में राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सांसद पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें और तेज हो गई हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
12 से 20 सांसदों के शामिल होने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में शामिल सांसदों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि करीब 20 सांसद मौजूद थे, जबकि कुछ के अनुसार यह संख्या 12 के आसपास थी। हालांकि वास्तविक संख्या को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
क्या संसद में तृणमूल को लगेगा बड़ा झटका?
बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या लोकसभा और राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस को किसी बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी और बैठक में शामिल नेताओं की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।