बांकुड़ा: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले से एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ग्राम पंचायत के प्रधान का दफ्तर के भीतर ही अत्यधिक नशे की हालत में होने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नागरिक सेवाएं देना तो दूर, जनप्रतिनिधि की हालत अपने पैर पर खड़े होने या कुर्सी पर बैठने तक की नहीं थी। वे नशे के झोंके में सीधे सरकारी दफ्तर के फर्श पर ही लेट गए। इस घटना को लेकर छातना इलाके में भारी आक्रोश और हंगामा देखा जा रहा है।
दफ्तर पहुंचे ग्रामीणों के उड़े होश
यह घटना छातना विधानसभा क्षेत्र के झुंझका ग्राम पंचायत की है। आरोपी प्रधान का नाम रामेश्वर हेम्ब्रम है, जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े हैं। जानकारी के मुताबिक, हर दिन की तरह गुरुवार को भी इलाके के कई ग्रामीण अपनी विभिन्न समस्याओं और सरकारी काम के सिलसिले में पंचायत कार्यालय पहुंचे थे।
जैसे ही ग्रामीण प्रधान के केबिन में दाखिल हुए, वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने देखा कि प्रधान रामेश्वर हेम्ब्रम दफ्तर के फर्श पर बेसुध पड़े हुए हैं। ग्रामीणों को यह समझने में बिल्कुल देर नहीं लगी कि यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि अत्यधिक शराब या नशे का नतीजा है।
कुर्सी पर बैठने की कोशिश का वीडियो वायरल
प्रधान की इस करतूत की खबर बिजली की तरह पूरे इलाके में फैल गई। देखते ही देखते पंचायत कार्यालय के बाहर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान कुछ लोगों ने प्रधान की इस हालत का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि:
प्रधान रामेश्वर हेम्ब्रम लड़खड़ाते हुए अपनी सरकारी कुर्सी पर बैठने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
नशे का असर इतना ज्यादा है कि वे सीधे बैठ भी नहीं पा रहे हैं और संतुलन खोकर बार-बार गिर रहे हैं।
अंततः वे पूरी तरह बेहोश होकर केबिन के फर्श पर ही ढह जाते हैं।
'सरकारी दफ्तर को पार्टी ऑफिस बना दिया था' — बीजेपी का तीखा हमला
एक जनप्रतिनिधि के इस गैर-जिम्मेदाराना और अशोभनीय व्यवहार की चौतरफा निंदा हो रही है। इस घटना को लेकर स्थानीय भाजपा (BJP) नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।
भाजपा नेताओं ने कहा, "तृणमूल के नेताओं ने पंचायत दफ्तरों को अपनी पार्टी का कार्यालय और अय्याशी का अड्डा बना दिया था। यही कारण है कि वहां खुलेआम ऐसे अनैतिक काम चल रहे थे। लेकिन अब राज्य में व्यवस्था बदल चुकी है, ऐसी हरकतों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।" इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी पंचायत कार्यालयों में तुरंत सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।