कोलकाता :पश्चिम बंगाल में नो-एंट्री प्रतिबंध के दौरान भारी वाहनों को प्रवेश दिलाने के नाम पर कथित अवैध वसूली के मामले में एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने कार्रवाई की है। एजेंसी ने हावड़ा निवासी संजीब को ट्रैप ऑपरेशन के दौरान कथित तौर पर रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी को शिकायत मिली थी कि दानकुनी और आसपास के इलाकों में दूसरे राज्यों से आने वाले नेशनल परमिट ट्रकों को नो-एंट्री के दौरान आगे बढ़ाने के लिए पैसे मांगे जा रहे थे। आरोप है कि रकम नकद के साथ-साथ UPI और बैंक ट्रांसफर के जरिए भी ली जाती थी। मामले की जांच में अब कथित वसूली नेटवर्क और कुछ ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, किसी अधिकारी की संलिप्तता अभी जांच का विषय है और इसे अंतिम तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।
UPI भुगतान के दौरान ACB ने बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद ACB ने कथित अवैध भुगतान को पकड़ने के लिए ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। एजेंसी के अनुसार, इसी कार्रवाई के दौरान संजीब ने नो-एंट्री क्लीयरेंस के नाम पर UPI के जरिए कथित अवैध रकम स्वीकार की। रकम स्वीकार किए जाने के बाद ACB की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पूछताछ में कथित नेटवर्क के संचालन और पैसों के लेन-देन से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
दानकुनी से शुरू होता था कथित नेटवर्क
जांच में सामने आए कथित तौर-तरीके के मुताबिक, दूसरे राज्यों और जिलों से आने वाले नेशनल परमिट ट्रक दानकुनी क्षेत्र में पहुंचते थे। नो-एंट्री प्रतिबंध के कारण ट्रक चालकों को शहर की ओर आगे बढ़ने में परेशानी होती थी। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ बिचौलिये या दलाल ट्रक चालकों से संपर्क करते थे और प्रतिबंधित समय में वाहन को आगे निकालने के नाम पर रकम की मांग करते थे। इसके बाद चालकों को कथित तौर पर नेटवर्क के ऑपरेटरों से संपर्क कराया जाता था।
प्रति ट्रक ₹2,000 से ₹2,500 की कथित वसूली
जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित नेटवर्क में प्रति ट्रक ₹2,000 से ₹2,500 तक की रकम मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। भुगतान के लिए नकद, UPI और बैंक ट्रांसफर जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। भुगतान के बाद कथित तौर पर ट्रक चालक को आगे बढ़ने के लिए किसी प्रकार का संदेश या क्लीयरेंस दिया जाता था। आरोप है कि इसके बाद वाहन संबंधित चेकपॉइंट से बिना चालान या जुर्माने के गुजर जाता था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
कई पुलिस कमिश्नरेट के नाम सामने आने का दावा
ACB की जांच में हावड़ा, कोलकाता, बिधाननगर और बारुईपुर पुलिस कमिश्नरेट के कुछ ट्रैफिक गार्डों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि सिंडिकेट ऑपरेटर इन अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर ट्रक चालकों से रकम वसूलता था। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वास्तव में किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी तक अवैध रकम पहुंची थी या नहीं। सिर्फ किसी अधिकारी का नाम सामने आना उसकी संलिप्तता साबित नहीं करता। इसलिए जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
कथित तौर पर अलग-अलग इलाकों में होता था पैसों का बंटवारा
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित वसूली से जमा रकम अलग-अलग इलाकों या अधिकार क्षेत्रों के हिसाब से बांटे जाने की आशंका है। इसमें हावड़ा, कोलकाता, बिधाननगर और बारुईपुर क्षेत्र का जिक्र सामने आया है। ACB अब कथित वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैसा किन लोगों तक पहुंचता था और भुगतान की पूरी श्रृंखला कैसे काम करती थी।
बैंक खातों और UPI ट्रांजेक्शन की जांच
गिरफ्तारी के बाद जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा संजीब के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल है। एजेंसी कथित तौर पर उसके बैंक खातों, UPI ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कर रही है। इन रिकॉर्ड के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरोपी ने किन ट्रक चालकों, बिचौलियों और कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों से संपर्क किया था। अगर वित्तीय रिकॉर्ड से किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति तक नियमित भुगतान का प्रमाण मिलता है, तो जांच आगे बढ़ सकती है।
करीब एक दशक से नेटवर्क चलने का दावा
जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, यह कथित वसूली नेटवर्क वर्ष 2014 के आसपास से सक्रिय होने की बात सामने आई है। यदि यह अवधि और नेटवर्क की संरचना जांच में प्रमाणित होती है, तो एजेंसी को लंबे समय से चल रहे कथित भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क की पड़ताल करनी होगी। इसमें पुराने भुगतान रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, मोबाइल नंबर और कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच अहम हो सकती है।
ACB की कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल
एक ट्रक से कथित अवैध वसूली के मामले से शुरू हुई जांच अब बड़े नेटवर्क की संभावित भूमिका तक पहुंचती दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल कुछ बिचौलियों और ऑपरेटरों तक सीमित था या इसके पीछे कोई व्यापक तंत्र काम कर रहा था। ACB की आगे की जांच और वित्तीय रिकॉर्ड से इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल संजीब की गिरफ्तारी हुई है और अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है। किसी भी आरोपी या अधिकारी के खिलाफ आरोप तब तक सिद्ध नहीं माने जा सकते, जब तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया में इसकी पुष्टि न हो जाए।