कोलकाता: कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज की जांच के दौरान कथित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का मामला सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री ने अस्पताल पहुंचकर मरीज और संबंधित अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। उन्होंने संकेत दिया कि यदि मौजूदा नियमों में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे दूर करने के लिए कानूनी बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
नौकरी के बहाने पंजाब ले जाने का आरोप
मरीज की USG जांच के दौरान डॉक्टरों को कथित तौर पर पता चला कि उसकी एक किडनी मौजूद नहीं थी। उसके पेट पर हालिया ऑपरेशन के निशान भी पाए गए। मरीज ने आरोप लगाया कि उसे हाउसकीपिंग की नौकरी दिलाने के नाम पर पंजाब के लुधियाना ले जाया गया था। वहां अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उसे ड्रिप लगाकर बेहोश किया गया और होश में आने पर उसे कथित तौर पर पता चला कि उसकी किडनी निकाल ली गई है। आरोप है कि कम पढ़ा-लिखा होने और स्थानीय भाषा की जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर उससे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
अस्पताल के दौरे के बाद मंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति की स्पष्ट और वैध सहमति के बिना उसकी किडनी निकालना गंभीर अपराध है। मामले में पुलिस कार्रवाई और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं और पश्चिम बंगाल के अलावा पंजाब तथा अन्य राज्यों में इसका नेटवर्क कितना फैला हुआ है।
विधानसभा में कानून कड़ा करने पर विचार
डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने कहा कि Live Unrelated Donor से जुड़े मौजूदा नियमों में यदि कोई खामी सामने आती है तो उसे दूर किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर राज्य विधानसभा में कानून में संशोधन या नए कानूनी प्रावधान लाने पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने गरीब, अनपढ़ और कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाकर अंगों के अवैध कारोबार को गंभीर अपराध बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत दिया।
जांच में सामने आएगा पूरे नेटवर्क का सच
अब स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की जांच का फोकस कथित किडनी नेटवर्क के पूरे संचालन, अस्पतालों की भूमिका, दस्तावेजों की वैधता और मरीज की सहमति से जुड़े पहलुओं पर है। हालांकि, किडनी निकालने और कथित रैकेट से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और पुलिस/फॉरेंसिक निष्कर्षों के बाद ही होगी।