कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नगर पालिका भर्ती घोटाले (Municipal Recruitment Scam) की जांच ने शनिवार को नया मोड़ ले लिया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। केंद्रीय एजेंसी की टीम ने भवानीपुर स्थित आवास, कामरहाटी के फ्लैट और जोका समेत कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी सूत्रों के अनुसार, नगर पालिकाओं में हुई कथित अवैध नियुक्तियों की जांच के दौरान मदन मित्रा का नाम सामने आया है। जांच एजेंसी को संदेह है कि विभिन्न नगर पालिकाओं में अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के बदले रिश्वत ली गई थी। आरोप है कि यह रकम नकद और सोने के रूप में बिचौलियों के जरिए पहुंचाई जाती थी।
डायरी में मिला 'MM' का जिक्र
जांच अधिकारियों को इस मामले के मुख्य आरोपी अयन शील से जुड़े दस्तावेजों और एक डायरी में 'MM' नाम का उल्लेख मिला था। राजनीतिक हलकों में मदन मित्रा को भी 'एमएम' के नाम से जाना जाता है। इसी आधार पर ईडी उनकी भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों का दावा है कि 125 से अधिक कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़े नेटवर्क में मदन मित्रा का नाम सामने आया है। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकला है और जांच जारी है।
कई नगर पालिकाओं में भूमिका की जांच
ईडी केवल कामरहाटी नगर पालिका ही नहीं, बल्कि अन्य नगर निकायों में हुई नियुक्तियों की भी जांच कर रही है। 2011 से लगातार कामरहाटी के विधायक रहे मदन मित्रा के प्रभाव और उसके कथित इस्तेमाल को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस
इसी बीच एक अन्य घटनाक्रम में शालबनी थाने की पुलिस केंद्रीय बलों के साथ टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची। जानकारी के अनुसार, उनके निजी सहायक सुमित रॉय के खिलाफ दर्ज कथित जबरन वसूली मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस वहां पहुंची थी। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।
कुणाल घोष को भी सीआईडी का नोटिस
शुक्रवार को राज्य सीआईडी ने मदन मित्रा को नोटिस सौंपा था। वहीं बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष को कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ के लिए रविवार को भवानी भवन में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
एक ही दिन में ईडी, पुलिस और सीआईडी की सक्रियता ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बता रहा है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और इसके राजनीतिक असर पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।