नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के अंदर मचे घमासान ने अब दिल्ली तक भूचाल ला दिया है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को राजनीतिक रूप से और अकेला करते हुए लोकसभा में पार्टी के कद्दावर नेता और लंबे समय से उत्तर कोलकाता के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने बगावती तेवर अख्तियार कर लिए हैं। शनिवार को दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेता और पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव के आवास पर सुदीप बंद्योपाध्याय की गुप्त बैठक के बाद बंगाल की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। इस कदम के साथ ही टीएमसी के बागी सांसदों की संख्या बढ़कर अब 20 होने जा रही है।
शताब्दी राय की गाड़ी में पहुंचे भाजपा नेता के घर
सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के अनुसार, शनिवार को टीएमसी की ही एक और वरिष्ठ सांसद शताब्दी राय अपनी कार में सुदीप बंद्योपाध्याय को लेकर दिल्ली के 9, मोतीलाल नेहरू रोड स्थित भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के निवास पर पहुंचीं। वहां दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक गंभीर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि शनिवार को हुई इस प्राथमिक बातचीत के बाद रविवार को सुदीप बंद्योपाध्याय के पाला बदलने यानी 'शिविर परिवर्तन' पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इसके बाद सोमवार को सभी बागी सांसद एक साथ संसद जाएंगे, जहां लोकसभा स्पीकर उनके दर्जे को लेकर कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं।
26 के चुनाव में हार के बाद ताश के पत्तों की तरह बिखरी टीएमसी
2026 के विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक शिकस्त के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से टूट चुकी है। पार्टी के भीतर दो तरफा बड़ी बगावत चल रही है:विधानसभा में विद्रोह: पार्टी के कुल 80 विधायकों में से अधिकांश ने अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए खुद को अलग कर लिया है। वे विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर 'असली तृणमूल' होने का दावा ठोक रहे हैं, जिसकी कानूनी लड़ाई जारी है।
संसद में बड़ी टूट: टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 19 सांसद पहले ही एनडीए (NDA) को अपना समर्थन देने का पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंप चुके हैं। अब सुदीप बंद्योपाध्याय के जुड़ने से यह संख्या 20 हो जाएगी।
ममता के 'संकटमोचक' ने ही छोड़ा साथ
सुदीप बंद्योपाध्याय का ममता बनर्जी के साथ रिश्ता दशकों पुराना और बेहद गहरा रहा है। चिटफंड घोटाले के आरोपों में कुछ साल जेल में बिताने के बाद जब वे जमानत पर बाहर आए, तो ममता बनर्जी ने उन्हें ससम्मान राजनीति में वापस लाकर लोकसभा में पार्टी का संसदीय दल का नेता (डिप्टी लीडर/लीडर) बनाया था। सुदीप बंद्योपाध्याय ही दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और टीएमसी के बीच समन्वय (तालमेल) बिठाने का काम करते थे।
लेकिन पिछले कुछ समय से टीएमसी के आंतरिक व्हाट्सएप ग्रुपों में सुदीप बंद्योपाध्याय के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा और असंतोष खुलकर सामने आ रहा था। माना जा रहा है कि इसी आंतरिक कलह और कार्यकर्ताओं के विरोध से क्षुब्ध होकर उन्होंने आखिरकार ममता बनर्जी का साथ छोड़ने और विद्रोही खेमे में शामिल होने का 99 फीसदी मन बना लिया है।