कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। विधानसभा में मीडिया की गतिविधियों को सीमित करने वाले नए सर्कुलर और टीएमसी नेता कुणाल घोष के घर CID टीम पहुंचने की घटना ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। विपक्ष ने विधानसभा में लागू किए गए नए नियमों को अलोकतांत्रिक बताते हुए सरकार और स्पीकर पर सवाल उठाए हैं। वहीं, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने CID के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विधानसभा में मीडिया मूवमेंट पर नया नियम
विधानसभा स्पीकर की ओर से जारी नए सर्कुलर में कहा गया है कि अब पत्रकार और फोटोग्राफर सदन के अंदर स्वतंत्र रूप से इधर-उधर नहीं घूम सकेंगे। उन्हें केवल निर्धारित प्रेस कॉर्नर तक सीमित रहना होगा। इस फैसले के बाद विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है। विपक्ष का कहना है कि इससे सदन की कार्यवाही और विपक्ष की आवाज जनता तक पहुंचाने में मुश्किल होगी।
विपक्ष बोला- अधिकार छीनने की कोशिश
विपक्ष के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष किसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराता है या वॉकआउट करता है, तो तुरंत प्रेस कॉर्नर जाकर मीडिया के जरिए अपनी बात जनता तक पहुंचाता है। लेकिन अब स्पीकर की अनुमति के बिना ऐसा करना संभव नहीं होगा। उनके मुताबिक यह फैसला विपक्ष की अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने वाला कदम है।
कुणाल घोष के घर पहुंची CID टीम
इसी बीच टीएमसी नेता कुणाल घोष के घर CID अधिकारियों के पहुंचने का मामला भी सुर्खियों में है। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि कुछ लोग CID का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब अधिकारी उनके घर पहुंचे, उस समय वह मौजूद नहीं थे। उन्होंने अधिकारियों से अगले दिन सुबह 11 बजे आने का अनुरोध किया था, लेकिन वह दोपहर 3 बजे तक इंतजार करते रहे और कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।
CID कार्रवाई पर उठाए सवाल
कुणाल घोष ने इस पूरी कार्रवाई को परेशान करने वाला बताते हुए कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन एजेंसियों का इस तरह इस्तेमाल सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि अगर जांच निष्पक्ष तरीके से हो तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
बंगाल की राजनीति में बढ़ा तनाव
विधानसभा के नए नियम और CID की कार्रवाई को लेकर बंगाल की राजनीति में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी इस विवाद पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।