कोलकाता: पश्चिम बंगाल की अष्टादश (18वीं) विधानसभा में इस बार एक नया इतिहास रचने जा रहा है। राज्य में पहली बार स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब विधायी कामकाज में पारदर्शिता और आधुनिकता लाने के लिए बड़े बदलावों की तैयारी कर चुकी है। गुरुवार को पत्रकारों से मुखातिब होते हुए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रथेंद्रनाथ बोस ने एलान किया कि अब से बंगाल विधानसभा पूरी तरह से डिजिटल और 'पेपरलेस' होगी। इसके अलावा, सदन की बारीकियों को समझाने के लिए नवनिर्वाचित विधायकों के लिए विशेष प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) की व्यवस्था की जाएगी।
लोकसभा और अन्य राज्यों के स्पीकर देंगे नए विधायकों को ट्रेनिंग
स्पीकर रथेंद्रनाथ बोस ने बताया कि इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा की तस्वीर काफी बदली हुई है और सदन में भारी संख्या में नए चेहरे चुनकर आए हैं।
स्पीकर का बयान: "इस बार विधानसभा में कम से कम 200 विधायक बिल्कुल नए हैं, जो पहली बार चुनकर आए हैं। उनके लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया जाएगा। आगामी बजट सत्र के ठीक बाद यह ट्रेनिंग शुरू होगी। खास बात यह है कि हमारे विधायकों को प्रशिक्षित करने के लिए लोकसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसी बड़ी विधानसभाओं के स्पीकर भी कोलकाता आएंगे।"
स्पीकर ने बताया कि 'ई-विधानसभा' (E-Vidhan Sabha) के फैसले के तहत सदन की पूरी कार्यप्रणाली को डिजिटल माध्यम पर स्थानांतरित किया जा रहा है। पेपरलेस होने से विधायी दस्तावेज, प्रश्नकाल और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सभी को सीधे और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होंगी, जिससे कामकाज में तेजी आएगी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का 'लाइव' महाप्लान
इससे पहले, 15 मई को जब रथेंद्रनाथ बोस निर्विरोध विधानसभा के स्पीकर चुने गए थे, उसी दिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक अभूतपूर्व घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि अब से बंगाल विधानसभा की पूरी कार्यवाही का टीवी और डिजिटल माध्यमों पर सीधा प्रसारण (Live Telecast) किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, बजट सत्र सहित सभी महत्वपूर्ण सत्रों को लाइव दिखाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि बंगाल की जनता अपने निर्वाचित विधायकों का प्रदर्शन, विपक्ष का आचरण और सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों को अपनी आँखों से लाइव देख सके। मुख्यमंत्री ने संदेश दिया था कि सदन का लक्ष्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि विपक्ष की स्वस्थ भागीदारी से लोकतंत्र को और समृद्ध बनाना है।
गुरुवार को स्पीकर रथेंद्रनाथ बोस ने भी मुख्यमंत्री के इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए साफ किया कि इन नई पहलों से सदन की गरिमा और पारदर्शिता और ज्यादा मजबूत होगी। आगामी 22 जून से शुरू हो रहे बजट सत्र में दर्शकों को इस नए और डिजिटल रूप की पहली झलक देखने को मिल सकती है।