कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पुलिस और जांच अधिकारियों (IO) की एक बड़ी लापरवाही के कारण साल्टलेक के मशहूर स्वर्ण व्यवसायी स्वप्न कामिल्या हत्याकांड का मुख्य आरोपी और राजगंज का अपदस्थ (Suspended) बीडीओ प्रशांत बर्मन जेल जाने से बच गया। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद भी केस की केस डायरी और संबंधित दस्तावेज समय पर अदालत न पहुंचने के कारण मंगलवार शाम को उसे ₹1000 के मुचलके (Bond) पर जमानत मिल गई और वह आसानी से घर चला गया।
न्यूटाउन में एक्सीडेंट के बाद हुआ था गिरफ्तार
दरअसल, प्रशांत बर्मन को सोमवार रात न्यूटाउन के इको पार्क थाना क्षेत्र में सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने और लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप में पकड़ा गया था। आरोप है कि प्रशांत की तेज रफ्तार कार ने पहले एक राहगीर को टक्कर मारी, जिससे वह राहगीर दूर खड़े एक स्कूटर सवार पर जा गिरा। हादसे में राहगीर के पैर में गंभीर चोट आई है। स्कूटर सवार ने ही प्रशांत की गाड़ी को रोका और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने प्रशांत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281, 125B और मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 184, 185 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उसे मंगलवार को बारासत अदालत में पेश किया था।
मजिस्ट्रेट करते रहे इंतजार, नहीं पहुंचे जांच अधिकारी
जब प्रशांत बर्मन को बारासत अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, तो जज ने मामले से जुड़े दस्तावेज मांगे। मजिस्ट्रेट ने मंगलवार शाम तक पुलिस और जांच अधिकारी का इंतजार किया, लेकिन न तो मर्डर केस की कोई फाइल पहुंची और न ही कोई अधिकारी कोर्ट में पेश हुआ।
बचाव पक्ष के वकील का दावा:
प्रशांत के वकील शिवप्रसाद मुखर्जी ने बताया, "मेरे मुवक्किल को जिस मामले (सड़क दुर्घटना) में गिरफ्तार कर बारासत अदालत लाया गया था, वह एक जमानती अपराध था। विधाननगर कोर्ट या किसी अन्य जगह से हत्या के मामले से जुड़ा कोई भी दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किया गया। सरकारी पक्ष ने अन्य मामले का हवाला जरूर दिया, लेकिन पुलिस की ओर से रिमांड या 'शोन अरेस्ट' (Shown Arrest) की कोई अर्जी नहीं दी गई। इसी वजह से अदालत ने जमानत मंजूर कर ली।"
कानूनी विशेषज्ञों और वकील अनिर्बान गुहा ठाकुरता के मुताबिक, यह बेहद हैरान करने वाला मामला है कि जब मुख्य मर्डर केस की जांच विधाननगर पुलिस कर रही थी और एक्सीडेंट का मामला भी उसी क्षेत्र के पास हुआ, तो दोनों जांच टीमों के बीच कोई तालमेल (Coordination) क्यों नहीं था।
क्या था स्वर्ण व्यवसायी हत्याकांड का मामला?
गौरतलब है कि पिछले साल 29 अक्टूबर को साल्टलेक के दत्ताबाद के रहने वाले स्वर्ण व्यवसायी स्वप्न कामिल्या का शव न्यूटाउन थाने के जात्रागाछी खालधार से बरामद हुआ था। आरोप था कि उनका अपहरण कर बेरहमी से मर्डर कर दिया गया था। इस हत्याकांड में पूर्व बीडीओ प्रशांत बर्मन मुख्य आरोपियों में से एक है।
प्रशांत ने पहले बारासत और विधाननगर कोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी, जिसे विधाननगर पुलिस ने कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज कर उसे तुरंत आत्मसमर्पण (Surrender) करने का आदेश दिया। इसके बाद इस साल 23 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रशांत बर्मन को सरेंडर करने का कड़ा निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद वह पुलिस की पकड़ से बाहर घूम रहा था। अब जब वह पुलिस के हत्थे चढ़ा भी, तो ढीली पैरवी के चलते फिर से आजाद हो गया।