कोलकाता: "करना स्प्रिट लिमिटेड" के तत्वाधान एवं सौजन्य से रविवार को कोलकाता में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में "सोसाइटी फॉर द वेलफेयर ऑफ वेस्ट बंगाल फॉरेन लिकर लाइसेंसेस" ने राज्य सरकार के समक्ष विदेशी शराब उद्योग से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। संगठन का दावा है कि वह पश्चिम बंगाल के 1,000 से अधिक लाइसेंसधारी विदेशी शराब विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करता है।
करना स्प्रिट लिमिटेड के सहयोग से उद्योग जगत का बड़ा मंच
"करना स्प्रिट लिमिटेड" के सौजन्य से आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने बढ़ती लागत, कम व्यापारिक मार्जिन, लाइसेंसिंग प्रक्रिया की जटिलताओं, शुल्क संरचना और अवैध शराब के कारोबार जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। साथ ही सरकार से नीतिगत सुधारों और उद्योग को राहत देने की मांग की गई।
संवाद और सहयोग पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में पूर्व सीबीआई पुलिस अधीक्षक संतनु कर और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्ती शंकुदेब पांडा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने उद्योग और सरकार के बीच बेहतर संवाद तथा सहयोग के माध्यम से समस्याओं के समाधान पर बल दिया।
कम मार्जिन और बढ़ती लागत से बढ़ी चिंता
संगठन के सचिव बिजन पात्रा ने कहा कि बढ़ती परिचालन लागत और नियमों के अनुपालन से जुड़े खर्चों के कारण मौजूदा कारोबारी ढांचा दबाव में है। उन्होंने उद्योग के लिए व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में संगठन ने राज्य सरकार से उद्योग से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने और सकारात्मक कदम उठाने की अपील की। कारोबारियों ने उम्मीद जताई कि आवश्यक सुधारों से उद्योग, उपभोक्ताओं और राज्य सरकार—तीनों को लाभ होगा।