कोलकाता: पश्चिम बंगाल के विदेशी शराब कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने राज्य सरकार से शराब बिक्री पर मिलने वाले व्यापारिक मार्जिन को बढ़ाकर एमआरपी का 10 प्रतिशत करने की मांग की है। इसके साथ ही कोविड-19 काल में लगाए गए विशेष शुल्कों को वापस लेने और मौजूदा शराब वितरण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की भी अपील की गई है। यह मुद्दा "करना स्प्रिट लिमिटेड" के सौजन्य से प्रमुखता से उठाया गया।
1,000 से अधिक लाइसेंसधारी दुकानदारों की आवाज
यह मांग सोसाइटी फॉर द वेलफेयर ऑफ वेस्ट बंगाल फॉरेन लिकर लाइसेंसेज की ओर से उठाई गई है, जो राज्यभर की 1,000 से अधिक लाइसेंसधारी विदेशी शराब दुकानों का प्रतिनिधित्व करती है। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ती परिचालन लागत और नियमों के अनुपालन पर बढ़ते खर्च के कारण मौजूदा कारोबारी ढांचा आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह गया है।
"करना स्प्रिट लिमिटेड" के सौजन्य से उठाई गई मांग
व्यापारियों की इस पहल को "करना स्प्रिट लिमिटेड" का समर्थन प्राप्त है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि राज्य के वैध शराब कारोबार को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है। उनका मानना है कि उचित लाभांश मिलने से लाइसेंसधारी दुकानदारों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी और राज्य के राजस्व संग्रह को भी मजबूती मिलेगी।
3.5-4% मार्जिन में कारोबार चलाना मुश्किल
संगठन के सचिव बिजन पात्रा ने पत्रकारों से कहा कि वर्तमान में व्यापारियों को केवल 3.5 से 4 प्रतिशत तक का लाभ मिल पा रहा है, जो किसी भी लिहाज से पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा- "हम 10 प्रतिशत मार्जिन की मांग कर रहे हैं। मौजूदा लाभांश के साथ कारोबार को टिकाऊ तरीके से चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।"
कोविड काल के विशेष शुल्क हटाने की मांग
व्यापारियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए विशेष शुल्कों को समाप्त करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि महामारी की परिस्थितियां अब समाप्त हो चुकी हैं, ऐसे में अतिरिक्त वित्तीय बोझ जारी रखना उचित नहीं है।
वितरण व्यवस्था की समीक्षा की अपील
विदेशी शराब विक्रेताओं ने राज्य सरकार से मौजूदा वितरण प्रणाली की समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि कारोबार को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। व्यापारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेगी, जिससे उद्योग, उपभोक्ताओं और राज्य के राजस्व—तीनों को लाभ मिलेगा।