कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार के चुनावी वादे के मुताबिक राज्य की सभी सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा सेवा (Free Bus Service) सोमवार से शुरू हो गई है। इस योजना को पहले ही दिन बंगाल की महिलाओं का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मुफ्त बस सेवा के पहले ही दिन महिला यात्रियों की संख्या में 22 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
आंकड़ों में देखिए मुफ्त सफर का असर
परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, योजना शुरू होने से ठीक पहले (पिछले सोमवार) जहां कोलकाता में 2 लाख और पूरे राज्य में 4 लाख महिलाओं ने सरकारी बसों में सफर किया था, वहीं 1 जून को योजना लागू होते ही:
कोलकाता में: महिला यात्रियों की संख्या बढ़कर 2,44,121 हो गई।
पूरे राज्य में: यह आंकड़ा बढ़कर करीब 4,88,000 तक पहुंच गया।
टॉप जिले: फ्री बस सेवा का लाभ उठाने में कोलकाता के बाद मुर्शिदाबाद, मालदा, पुरुलिया और बांकुड़ा जिले सबसे आगे रहे।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी। इसे देखते हुए भविष्य में बसों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
बसों में बढ़ेगी महिलाओं और बुजुर्गों की सीटें
महिला यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सरकार अब बसों में बैठने की व्यवस्था को भी अपग्रेड करने जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल के दौरान बसों में महिलाओं के लिए 18 से 20 प्रतिशत सीटें आरक्षित थीं। अब नई सरकार सभी सरकारी बसों में महिलाओं और बुजुर्गों (Senior Citizens) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को और बढ़ाने जा रही है, ताकि उन्हें सफर में कोई परेशानी न हो।
औचक निरीक्षण के लिए खुद सरकारी बस में चढ़ीं मंत्री अग्निमित्रा पॉल
यह मुफ्त बस सेवा सिर्फ कागजों पर है या जमीन पर भी लागू हो रही है, इसे खुद परखने के लिए राज्य की पुर (नगरीय विकास) मंत्री अग्निमित्रा पॉल सोमवार को अचानक मैदान में उतर पड़ीं।
सोमवार दोपहर अग्निमित्रा पॉल ने गरियाहाट मोड़ से रूबी जाने वाली एक सरकारी बस को रुकवाया और उसमें सवार हो गईं। मंत्री को अचानक बस में देखकर कंडक्टर और आम यात्री चौंक गए। अग्निमित्रा पॉल बस में एक महिला यात्री के बगल वाली सीट पर बैठ गईं और उनसे बातचीत की। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि 'क्या उनसे जबरन टिकट के पैसे तो नहीं मांगे जा रहे?'
"सरकार सिर्फ निर्देश जारी करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। काम ठीक से हो रहा है या नहीं, यह देखना हमारी जिम्मेदारी है। बंगाल की मां-बहनों को इस योजना से सीधा लाभ मिल रहा है, यही हमारी सरकार की सफलता है। कई गरीब परिवारों के लिए रोजाना 50 से 100 रुपये बचाना बहुत बड़ी बात होती है।"
अग्निमित्रा पॉल, मंत्री
इसके बाद मंत्री ने खुद नियमों का पालन करते हुए बस कंडक्टर से अपने लिए एक 'जीरो वैल्यू टिकट' (Zero Value Ticket) लिया। परिवहन विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस योजना को और बेहतर बनाने के लिए यात्रियों से फीडबैक भी लिया जाएगा।