कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और शैक्षणिक बहस तेज हो गई है। आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सरकारी स्कूलों में छात्रों के ड्रॉपआउट की संख्या लगातार बढ़ी है। जानकारों का मानना है कि केवल कोलकाता ही नहीं, बल्कि जिलों के सरकारी स्कूल भी संसाधनों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।
19 हजार स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक
सामने आए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के करीब 19 हजार सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं कई स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों की कमी के चलते पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कुछ स्कूलों के बंद होने की भी बात कही जा रही है।
2025-26 में 80 लाख छात्रों ने छोड़े सरकारी स्कूल!
जानकारी के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान पश्चिम बंगाल में लगभग 80 लाख छात्रों ने सरकारी स्कूलों से पढ़ाई छोड़ दी या सरकारी स्कूलों का साथ छोड़ दिया। इस दावे के बाद शिक्षा जगत में चिंता और चर्चा का माहौल है। हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग दावे भी सामने आ सकते हैं।
अग्निमित्रा पाल ने जताई चिंता
भाजपा नेता और राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "इससे अधिक चिंताजनक या दुर्भाग्यपूर्ण बात और कुछ नहीं हो सकती।" उनके बयान के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या, शिक्षकों की कमी और बंद हो रहे स्कूलों के दावों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार इन आरोपों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों पर क्या कदम उठाती है।