कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग (Home & Hill Affairs Department) ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश जारी कर अपने-अपने जिलों में ‘होल्डिंग सेंटर’ (Holding Centre) स्थापित करने को कहा है। सरकार का उद्देश्य अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज करना है।

केंद्र सरकार के निर्देश के बाद राज्य में शुरू हुई कार्रवाई
राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश 23 मई 2026 को जारी किया गया था, जो 24 मई को सार्वजनिक हुआ। इस आदेश में कहा गया है कि यह कदम केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा मई 2025 में जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर उठाया जा रहा है। केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया था कि अवैध विदेशी नागरिकों और सजा पूरी कर चुके विदेशी कैदियों के लिए अलग होल्डिंग व्यवस्था तैयार की जाए।
किन लोगों को रखा जाएगा होल्डिंग सेंटर में?
सरकारी आदेश के अनुसार इन होल्डिंग सेंटर्स में मुख्य रूप से दो प्रकार के लोगों को रखा जाएगा। पहला, वे विदेशी नागरिक जो भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं, जिनमें खास तौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिक शामिल हैं। दूसरा, ऐसे विदेशी कैदी जो जेल की सजा पूरी कर चुके हैं लेकिन दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण अब तक अपने देश नहीं भेजे जा सके हैं।
सरकार का कहना है कि इन लोगों को नियमित जेलों से अलग रखकर डिपोर्टेशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा।
जिला प्रशासन और पुलिस को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने इस आदेश की प्रतियां पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DG & IGP), सभी पुलिस कमिश्नरों, FRRO कोलकाता और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को भी भेजी हैं। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द उपयुक्त स्थानों की पहचान कर होल्डिंग सेंटर की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही गृह मंत्रालय की विस्तृत गाइडलाइन भी संलग्न की गई है, ताकि इन सेंटरों का संचालन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत किया जा सके।
अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर फिर तेज हुई राजनीति
पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा लंबे समय से बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। भाजपा लगातार राज्य सरकार पर अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को संरक्षण देने का आरोप लगाती रही है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान, निगरानी और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है।