कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय 'नवान्न' (Nabanna) के गलियारों से अब सिर्फ फाइलों के सरकने की आवाज ही नहीं आ रही, बल्कि वहां मंत्रोच्चार की ध्वनि और कपूर-धूप की खुशबू भी बिखरने लगी है। राज्य में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद सचिवालय की प्रशासनिक आबोहवा अचानक पूरी तरह 'आध्यात्मिक' हो चली है। वजह है पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के दागी और जेल की हवा खा चुके पूर्व मंत्रियों के कमरों को लेकर नए मंत्रियों के मन में बैठा खौफ।
ऐसा ही एक दिलचस्प नजारा तब देखने को मिला जब राज्य के नए गृह राज्य मंत्री ने अपने अलॉटेड केबिन का इतिहास सुना और उनके 'कान खड़े' हो गए।
कमरे का इतिहास सुनते ही सहम गए गृह राज्य मंत्री विशाल लामा
वाकया नवान्न की पहली मंजिल पर स्थित प्रसिद्ध कमरा नंबर 101 का है। कालचीनी से भाजपा विधायक और नई सरकार में गृह व पर्वतीय मामले तथा अल्पसंख्यक मामलों के नवनियुक्त राज्य मंत्री विशाल लामा गुरुवार को जब पहली बार नवान्न में अपने दफ्तर का निरीक्षण करने पहुंचे, तो उन्हें एक 'ऐतिहासिक' झटका लगा।
जैसे ही अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह वही कमरा है, जहां शिक्षक भर्ती घोटाले (SSC Scam) में जेल जाने से पहले तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी बैठा करते थे, विशाल लामा के मुंह से अनायास ही निकला: "ओरे बाबा! इस कमरे में पार्थ चटर्जी बैठते थे! तब तो बिना पूजा-पाठ और शुद्धिकरण किए मैं इस कमरे के भीतर पैर भी नहीं रख सकता।"
धूल झाड़ने से काम नहीं चलेगा, बकायदा वैदिक रीति से हुई पूजा
साल 2022 के जुलाई महीने में जब ईडी (ED) ने पार्थ चटर्जी के घर और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के फ्लैटों पर छापा मारकर करोड़ों का कैश बरामद किया था, तभी से इस कमरे पर ताला लटका हुआ था। हालांकि, पिछले साल (नवंबर 2025) पार्थ चटर्जी को लंबी कैद के बाद जमानत तो मिल गई, लेकिन उनके नाम के साथ जुड़ा 'भ्रष्टाचार का साया' अभी भी इस कमरे की दीवारों में महसूस किया जा रहा है।
नए राज्य मंत्री विशाल लामा ने साफ कह दिया कि जहां पूर्व मंत्री के 'काले कारनामों' की परछाई हो, वहां सिर्फ डस्टर से धूल झाड़कर काम शुरू नहीं किया जा सकता। इसके बाद शुक्रवार को बकायदा पंडित जी को बुलाकर पूरे कमरे को गंगाजल से धोया गया, शुद्धिकरण की पूजा हुई और मंत्रोच्चार के बाद ही मंत्री जी अपनी कुर्सी पर बैठे। अपनी सफाई में उन्होंने कहा, "कोई भी नया शुभ काम शुरू करने से पहले भगवान की पूजा करना हमारी सनातन परंपरा है। विधायक बनने के बाद मैंने अपने दफ्तर में भी ऐसा ही किया था।"
इंद्रनील सेन की कुर्सी देखकर भड़कीं पर्यटन मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती
नवान्न के भीतर पूर्ववर्ती सरकार के 'भ्रष्टाचार के भूत' से डरने वाले विशाल लामा अकेले मंत्री नहीं हैं। इनसे ठीक एक दिन पहले सूचना एवं संस्कृति और पर्यटन विभाग की नई कैबिनेट मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने भी ऐसा ही कदम उठाकर सुर्खियां बटोरी थीं।
जैसे ही पूर्णिमा चक्रवर्ती अपने विभाग के दफ्तर में पहुंचीं, उन्हें पता चला कि वहां रखी मुख्य कुर्सी पूर्व पर्यटन मंत्री और गायक इंद्रनील सेन की है (जिनके खिलाफ और उनकी पत्नी के खिलाफ हाल ही में भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज हुई है)। यह सुनते ही उन्होंने तपाक से अधिकारियों से पूछा, "क्या यह कुर्सी थोड़ी बदली जा सकती है?"
मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने सख्त लहजे में कहा:
अंधकार का आरोप: "जो महाशय पहले इस कुर्सी पर बैठते थे, उन्होंने कई 'महान कीर्तिमान' (घोटाले) रचे हैं और बंगाल को सिर्फ अंधकार में धकेलने का काम किया है।"
कुर्सी बदलने की जिद: "मैं ऐसे भ्रष्ट व्यक्ति की इस्तेमाल की हुई कुर्सी पर बिल्कुल नहीं बैठूंगी। मुझे तुरंत नई कुर्सी चाहिए।" जिसके बाद प्रशासनिक अमले को आनन-फानन में नई कुर्सी की व्यवस्था करनी पड़ी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा, फाइल से ज्यादा 'वास्तु दोष' पर ध्यान
बीजेपी नेता चुनाव से पहले लगातार 'भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल' का नारा दे रहे थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद सचिवालय में जो नजारे दिख रहे हैं, उसे लेकर राजनीतिक गलियारों में अब जमकर चटखारे और मजे लिए जा रहे हैं। विपक्षी और राजनीतिक विश्लेषक चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि नए मंत्रियों को सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर करने और नीतियां बनाने से ज्यादा चिंता फिलहाल नवान्न का 'वास्तु दोष' और 'नेगेटिव एनर्जी' दूर करने की सता रही है।