कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त और पार्टी में मची चौतरफा बगावत के बाद, क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कांग्रेस में विलय (Merger) कर खुद को बचाने की कोशिश कर रही हैं? दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरें तो इसी ओर इशारा कर रही हैं। सूत्रों का दावा है कि दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बीच टीएमसी और कांग्रेस के एकीकरण को लेकर गंभीर चर्चा हुई है और कांग्रेस आलाकमान की ओर से ममता को पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
लेकिन इस महा-डील के सामने अब सबसे बड़ा रोड़ा पश्चिम बंगाल की 'प्रदेश कांग्रेस' (State Congress Unit) बनकर खड़ी हो गई है। दिल्ली में सोनिया और राहुल गांधी के साथ ममता-अभिषेक की बैक-टू-बैक बैठकों के बीच, बंगाल कांग्रेस के भीतर इस संभावित विलय को लेकर जबरदस्त असंतोष और विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई है।
प्रदेश कांग्रेस में दरार: 'तृणमूल के कुशासन का दाग हम क्यों लें?'
बंगाल के स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता, जो पिछले 15 सालों से राज्य में टीएमसी के कथित अत्याचारों, हिंसा और मुकदमों को झेल रहे हैं, वे किसी भी कीमत पर ममता बनर्जी को अपनी नेता के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह से दो धड़ों में बंट गई है।
अधीर रंजन चौधरी और अब्दुल मन्नान जैसे वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं ने इस फैसले के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। उनका मानना है कि इस समय ममता को कांग्रेस के भीतर शरण देने का मतलब होगा— टीएमसी के 15 साल के भ्रष्टाचार और कुशासन की जिम्मेदारी खुद के सिर लेना।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान का कड़ा रुख:"मुझे अपने केंद्रीय कांग्रेस नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। लेकिन मैं साफ कर देना चाहता हूँ— ममता बनर्जी के साथ कोई गठबंधन या विलय स्वीकार्य नहीं है (No Alliance with Mamata Banerjee)।"
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी का तीखा हमला:"यह प्रकृति का न्याय है। जो ममता बनर्जी एक समय बंगाल में कांग्रेस को तोड़कर उसका वजूद मिटाने पर तुली हुई थीं, आज वही ममता बनर्जी अपनी पार्टी को बचाने के लिए गांधी परिवार के सामने जाकर हाथ-पैर जोड़ रही हैं। वे सिर्फ अपने पापों का फल भुगत रही हैं।"
प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार का रुख थोड़ा नरम, लेकिन रखी कड़ी शर्तें
इन कड़े तेवरों के बीच, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) के अध्यक्ष शुभंकर सरकार (Shuvankar Sarkar) का रुख थोड़ा संतुलित और नरम दिखाई दिया। उन्होंने पार्टी में आने की इच्छा रखने वालों के लिए बेहद सख्त शर्तें सामने रखी हैं:
राहुल गांधी को नेता मानना होगा: शुभंकर सरकार ने दो टूक कहा कि अगर कोई भी नेता कांग्रेस में आना चाहता है, तो उसे सबसे पहले यह खुले दिल से स्वीकार करना होगा कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ही कांग्रेस के सर्वोच्च नेता हैं और वही देश के प्रधानमंत्री पद का चेहरा होंगे।
अभिषेक बनर्जी के लिए दरवाजे बंद: टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) को लेकर प्रदेश अध्यक्ष का रुख बेहद कड़ा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "अगर किसी के दामन पर भ्रष्टाचार के गंभीर दाग लगे हैं और वह खुद को केंद्रीय जांच एजेंसियों से बचाने के लिए कांग्रेस की छतरी के नीचे आना चाहता है, तो उसके लिए कांग्रेस के दरवाजे कभी नहीं खुलेंगे।"
दिल्ली में बैठकों का दौर जारी
यह विवाद ऐसे समय पर बढ़ा है जब मंगलवार को 10, जनपथ पर सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच लंबी बातचीत हुई और ठीक उसके अगले दिन यानी बुधवार को अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही दिल्ली में आलाकमान ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा पद और राजनीतिक संरक्षण देने की तैयारी कर रहा हो, लेकिन अगर बंगाल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं का गुस्सा नहीं थमा, तो यह विलय फायदे के बजाय कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।