कोलकाता/दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक भूचाल आ चुका है। लोकसभा और राज्यसभा में एक के बाद एक सांसदों के पाला बदलने से पहले से ही संकट से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अब तक का सबसे तगड़ा राजनीतिक झटका लगा है। दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा (ममता बनर्जी का गृह क्षेत्र) में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की करारी हार और पड़ोसी सीट रासबिहारी को गंवाने के बाद, अब टीएमसी के सबसे मजबूत गढ़ 'दक्षिण कोलकाता लोकसभा क्षेत्र' में भी ऐतिहासिक टूट हो गई है। दक्षिण कोलकाता की बेहद प्रभावशाली और वरिष्ठ टीएमसी सांसद माला राय (Mala Roy) ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है और वे 'एनडीए समर्थक बागी ब्लॉक' में शामिल होने जा रही हैं।
परिवार समेत दिल्ली पहुँचीं माला राय
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, माला राय मंगलवार दोपहर बाद अपने पति निर्वेद राय, बेटे और बेटी के साथ अचानक फ्लाइट से दिल्ली रवाना हो गईं। राजनीतिक गलियारों में यह खबर बेहद पुख्ता है कि अगर मंगलवार शाम तक उनके आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, तो आज यानी बुधवार को वे बागी ब्लॉक के समर्थन पत्र पर अपने दस्तखत कर देंगी।
ममता का सबसे अटूट भरोसा भी टूटा
जब काकली घोष दस्तिदार, सायोनी घोष, पार्थ भौमिक और यूसुफ पठान जैसे बड़े चेहरे एक-एक कर ममता बनर्जी के मुख्य धड़े से दूरी बना रहे थे, तब राजनीतिक पंडितों का मानना था कि माला राय कम से कम ममता का साथ नहीं छोड़ेंगी। माला राय न केवल सांसद हैं बल्कि कोलकाता नगर निगम (KMC) की चेयरपर्सन भी हैं और दक्षिण कोलकाता की जमीनी राजनीति पर उनकी जबरदस्त पकड़ है। ऐसे में माला राय का ममता-अभिषेक पर से भरोसा उठना और बागी पाले में जाना कोलकाता की राजनीति को पूरी तरह हिला देने वाला है।
बागी गुट की ताकत हुई दोगुनी, '20 पार' का लक्ष्य करीबविद्रोही टीएमसी खेमे के सूत्रों का कहना है कि माला राय के आने से लोकसभा में उनके बागी ब्लॉक की ताकत बहुत बढ़ गई है। इससे पहले सोमवार रात को ही टीएमसी के 16 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखे पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद मंगलवार को सायोनी घोष और अब माला राय व मिताली बाग का नाम भी इस लिस्ट से जुड़ रहा है। ऐसे में बागी गुट का '20 से ज्यादा सांसदों' को अपने साथ जोड़ने का दावा अब सच साबित होने के बेहद करीब है।
क्या पूरी तरह 'अकेले' पड़ गए अभिषेक-महुआ?
राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि माला राय जैसी जमीनी और वरिष्ठ नेता का ममता बनर्जी का हाथ छोड़ना कोलकाता के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए एक बहुत बड़ा मानसिक झटका है। इस बगावत के दो बेहद गंभीर परिणाम होने वाले हैं:
संसद में मल्टिपल म्यूटिनी: लोकसभा में अब अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद जैसे नेता पूरी तरह से अलग-थलग और अल्पसंख्यक (Minority) बनकर रह जाएंगे।
संगठन पर असर: कोलकाता की स्थानीय राजनीति और नगर निगम के प्रशासनिक व सांगठनिक ढांचे पर भी इस टूट का बेहद घातक और दूरगामी असर पड़ेगा। टीएमसी के अस्तित्व पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है।