कोलाघाट (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ऐतिहासिक हार के बाद पार्टी के भीतर का असंतोष अब पूरी तरह से ज्वालामुखी बनकर फटने लगा है। महज 24 घंटे के भीतर टीएमसी के अंदरूनी कलह और गुस्से की आंच सीधे राज्य के नए प्रशासनिक मुखिया के दरबार तक पहुँच गई है। कोलाघाट में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) की अध्यक्षता में चल रही तीन जिलों (पूर्वी व पश्चिमी मेदिनीपुर और झाड़ग्राम) की प्रशासनिक बैठक में मेदिनीपुर से टीएमसी सांसद और सेलिब्रिटी नेता जून मालिया (June Malia) ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ राजनीतिक विस्फोट कर दिया।
मुख्यमंत्री के सामने छलका जून मालिया का दर्द
प्रशासनिक मंच का इस्तेमाल करते हुए जून मालिया ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सामने अपनी ही पार्टी के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा खोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 2 साल से सांसद होने के बावजूद पार्टी की अंदरूनी राजनीति के कारण उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र में कोई काम नहीं करने दिया गया।
सांसद जून मालिया ने बैठक में कहा:"साल 2024 के लोकसभा चुनाव में मैं सांसद चुनी गई थी। लेकिन कड़वा सच यह है कि पिछले दो वर्षों से तृणमूल कांग्रेस ने मुझे मेरे ही क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम करने की आजादी नहीं दी। पार्टी के एक गुट के असहयोग के कारण मैं अपने क्षेत्र की जनता के लिए कोई बड़ा विकास कार्य नहीं कर सकी। मैं मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करती हूँ कि आप व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखें ताकि मेदिनीपुर के रुके हुए विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सके।"
भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद बदले तेवर
गौरतलब है कि टीएमसी में यह दरार केवल जून मालिया तक सीमित नहीं है। चुनाव में हार के बाद पार्टी आड़े-तिरछे दो धड़ों में बंट चुकी है। विधानसभा के भीतर विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में करीब 60 विधायकों ने 'नई तृणमूल' का गठन कर मुख्य नेतृत्व को चुनौती दी है, वहीं दिल्ली में वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में कई सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। इसी बागी गुट में शामिल जून मालिया ने सोमवार को ही दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव से बेहद अहम मुलाकात की थी, और इसके ठीक 24 घंटे बाद उन्होंने कोलाघाट में टीएमसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
सांसद देव का रुख रहा सकारात्मक, 'घाटাল मास्टर प्लान' पर हुई चर्चा
इस बैठक में घाटाल से टीएमसी के एक और सेलिब्रिटी सांसद देव (Dev) भी मौजूद थे। हालांकि, उन्होंने जून मालिया की तरह शिकायत का रास्ता न चुनकर, अपने चिर-परिचित अंदाज में घाटाल के बाढ़ नियंत्रण और ऐतिहासिक 'घाटाल मास्टर प्लान' को जल्द से जल्द लागू करने पर जोर दिया।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मीडिया से कहा:"राज्य के समग्र विकास और मेदिनीपुर में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए घाटाल मास्टर प्लान को लेकर सांसद देव ने बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बात रखी है। मैं राज्य के प्रशासनिक प्रमुख के तौर पर मेदिनीपुर की जनता को आश्वस्त करता हूँ कि बरसों से लटका हुआ यह घाटाल मास्टर प्लान अब हमारी नई सरकार पूरी तरह से अपने हाथ में लेकर लागू करेगी।"
मुख्यमंत्री के इस आश्वासन पर सांसद देव ने भी भरोसा जताते हुए कहा कि हमारी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व में जिस ऐतिहासिक परियोजना का सपना देखा गया था, वह अब वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के हाथों पूरा होगा।
सियासी जानकारों का विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के चुनाव नतीजों और सत्ता से बेदखल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह बिखर चुकी है। कभी ममता बनर्जी जिन फिल्मी सितारों को राजनीति के मैदान में लेकर आई थीं और बिना किसी राजनीतिक अनुभव के उन्हें बड़े पदों पर बिठाया था, आज संकट के समय में वही चेहरे 'मँझे हुए राजनेता' की तरह पाला बदलते और बगावत करते नजर आ रहे हैं।