कोलकाता. पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लेकर नई पहल शुरू हुई है। राज्य सरकार ने प्रस्तावित पश्चिम बंगाल यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक-2026 के प्रारूप की समीक्षा के लिए नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति को मसौदे का कानूनी परीक्षण कर आवश्यक सुझाव देने तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक पेश करने पर विचार कर सकती है।
समिति में न्यायपालिका, प्रशासन और शिक्षा जगत के विशेषज्ञ शामिल
गठित समिति में न्यायपालिका, प्रशासन, कानून, शिक्षा और सार्वजनिक नीति से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दुष्यंत नरियाला, आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, गृह सचिव संघमित्रा घोष, प्रोफेसर रत्ना भट्टाचार्य, प्रोफेसर गोपाल चंद्र मिश्रा, अधिवक्ता उस्मान गनी मलिक तथा निर्मल्या भट्टाचार्य प्रमुख सदस्य हैं। सरकार का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों को शामिल करते हुए ऐसा मसौदा तैयार करना है जो व्यापक कानूनी परीक्षण पर खरा उतर सके।
राज्यभर में लोगों से लिए जाएंगे सुझाव
समिति केवल दस्तावेजी समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों का दौरा कर नागरिकों, सामाजिक संगठनों और संबंधित पक्षों से सुझाव भी प्राप्त करेगी। सरकार का मानना है कि व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों जैसे संवेदनशील विषय पर व्यापक जनभागीदारी आवश्यक है। प्राप्त सुझावों के आधार पर समिति अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करेगी, जिससे कानून को अधिक व्यावहारिक और संतुलित बनाया जा सके।
प्रस्तावित UCC में इन प्रमुख विषयों पर हो सकता है फोकस
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रस्तावित मसौदे में एक से अधिक विवाह पर रोक, महिलाओं और पुरुषों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, बाल विवाह की रोकथाम के उपाय तथा लिव-इन रिलेशनशिप के लिए नियामक व्यवस्था जैसे विषय शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू अथवा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के मॉडल का भी अध्ययन कर रही है। प्रारंभिक संकेत हैं कि अनुसूचित जनजाति समुदायों को कानून के कुछ प्रावधानों से छूट देने पर भी विचार किया जा सकता है।
UCC को लेकर सियासी टकराव भी तेज
समान नागरिक संहिता का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी प्रमुख बहस का विषय बन गया है। भारतीय जनता पार्टी इसे अपने प्रमुख चुनावी वादों में शामिल कर चुकी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इस प्रस्ताव का लगातार विरोध करती रही है। विपक्ष का कहना है कि व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े किसी भी व्यापक बदलाव से पहले विस्तृत सार्वजनिक विमर्श और सभी समुदायों से व्यापक परामर्श आवश्यक है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा के साथ-साथ राज्य की राजनीति में भी केंद्र में रहने की संभावना है।