मुंबई. भारतीय रिज़र्व बैंक ने डिजिटल बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार यदि किसी ग्राहक के खाते से साइबर धोखाधड़ी के कारण धनराशि निकलती है, तो उसकी जिम्मेदारी बैंक की होगी और ग्राहक को उसका पैसा वापस मिलेगा। यह फैसला तेजी से बढ़ रहे डिजिटल लेनदेन के दौर में उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ग्राहक की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम
हालांकि केंद्रीय बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि यदि बैंक यह साबित कर देता है कि धोखाधड़ी ग्राहक की लापरवाही के कारण हुई है, तो बैंक भुगतान के लिए बाध्य नहीं होगा। इसलिए ग्राहकों को भी सतर्क रहना होगा। ओटीपी साझा करना, संदिग्ध एप डाउनलोड करना या अनजान लिंक पर क्लिक करना जैसी गलतियां भारी नुकसान का कारण बन सकती हैं। इस व्यवस्था में सुरक्षा और जिम्मेदारी दोनों का संतुलन आवश्यक है।
छोटे फ्रॉड पर तत्काल राहत का प्रावधान
नए निर्देशों के तहत 50 हजार रुपये से कम के साइबर फ्रॉड मामलों में ग्राहक को तत्काल राहत देने की व्यवस्था की गई है। ऐसे मामलों में बैंक तुरंत 25 हजार रुपये तक की राशि ग्राहक के खाते में जमा करेगा, जबकि शेष राशि के भुगतान के लिए एक विस्तृत तंत्र तैयार किया जा रहा है। यह कदम पीड़ित ग्राहकों को त्वरित राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एक जुलाई से लागू होंगे नए नियम
केंद्रीय बैंक के ये नए निर्देश आगामी एक जुलाई से लागू होने की संभावना है। इसके तहत न केवल बैंक खातों बल्कि क्रेडिट कार्ड लेनदेन को भी अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा। यदि क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कोई अनधिकृत लेनदेन होता है, तो ग्राहक को उसकी भरपाई तुरंत की जाएगी। बाद में बैंक और कार्ड कंपनी आपस में यह तय करेंगे कि जिम्मेदारी किसकी थी।
शिकायत निपटान के लिए तय समयसीमा
इन निर्देशों के अनुसार यदि किसी ग्राहक के साथ वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे पांच कार्यदिवस के भीतर शिकायत दर्ज करानी होगी। शिकायत मिलने के बाद बैंक को 30 दिनों के भीतर उसका निपटान करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बैंक को यह भी साबित करना होगा कि यदि गलती ग्राहक की थी, तो वह किस प्रकार हुई। यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा
70 वर्ष से अधिक आयु के ग्राहकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे ग्राहक 50 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए किसी विश्वसनीय व्यक्ति को अधिकृत कर सकते हैं, जो उस लेनदेन की पुष्टि करेगा। इसके अलावा, कम गतिविधि वाले खातों में बड़े लेनदेन होने पर बैंक को सूचित करना भी आवश्यक होगा, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सके।
साइबर अपराध पर कड़ा नियंत्रण
साइबर अपराधी अक्सर कम लेनदेन वाले खातों का उपयोग अवैध धन को स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। इसे रोकने के लिए बैंक ऐसे खातों पर निगरानी बढ़ाएंगे और लेनदेन की सीमा निर्धारित करेंगे। साथ ही हर संदिग्ध गतिविधि पर अलर्ट जारी किया जाएगा, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके।
सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर कदम
कुल मिलाकर केंद्रीय बैंक के ये निर्देश डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। इससे न केवल ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि साइबर अपराधों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। हालांकि, तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ जागरूकता और सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है, ताकि डिजिटल युग में वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।