कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सरकारी सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य उच्च शिक्षा विभाग ने आखिरकार जनवरी 2016 से दिसंबर 2019 तक के बकेया **महंगाई भत्ते (Dearness Allowance - DA) के निर्धारण को लेकर आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर दी है।
विभाग ने क्या दिया निर्देश?
उच्च शिक्षा विभाग के उप-सचिव ने राज्य के 31 विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को एक पत्र भेजकर निम्नलिखित कदम उठाने को कहा है:
डेटा संकलन: सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, अधिकारियों, शिक्षाकर्मियों और पेंशनभोगियों के बकाया डीए की गणना की जाए।
सत्यापन: सर्विस बुक (Service Book) के आधार पर बकाये की राशि को प्रमाणित (Certify) किया जाए।
रिपोर्ट: विस्तृत गणना और प्रमाणीकरण के बाद पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द उच्च शिक्षा विभाग को भेजी जाए।
कर्मचारी यूनियनों में असंतोष: "केवल समय बर्बाद करने का खेल"
भले ही विभाग ने गणना शुरू करने का आदेश दिया है, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने इसे लेकर संशय व्यक्त किया है। कलकत्ता यूनिवर्सिटी एम्प्लॉइज यूनियन के अध्यक्ष **शुभेंदु मुखोपाध्याय** ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं:
विभाजन की राजनीति: उनका आरोप है कि राज्य ने पहली बार सरकारी कर्मचारियों और सहायता प्राप्त संस्थानों के कर्मचारियों के लिए एक साथ आदेश जारी नहीं किया, जो एक भेदभावपूर्ण रवैया है।
स्पष्टता का अभाव: शुभेंदु मुखोपाध्याय के अनुसार, "विज्ञप्ति तो जारी कर दी गई है, लेकिन पैसा देने की प्रक्रिया (Payment Method) का कहीं कोई जिक्र नहीं है। यह केवल समय बिताने और कर्मचारियों को उलझाने की कोशिश है।"