नई दिल्ली - मानसून के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। अब तक डेंगू और मलेरिया सबसे बड़ी चिंता माने जाते थे, लेकिन इन दिनों वेस्ट नाइल वायरस (West Nile Virus) को लेकर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं। यह संक्रमण संक्रमित क्यूलेक्स (Culex) प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है और गंभीर मामलों में मस्तिष्क तक पहुंचकर ब्रेन में सूजन (एन्सेफलाइटिस) जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) के अनुसार ग्रीस, इटली और स्पेन सहित कई देशों में वेस्ट नाइल वायरस के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत में भी पहले अलग-अलग राज्यों में इसके मामले सामने आ चुके हैं और इस साल केरल में भी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। ऐसे में मानसून के दौरान सतर्क रहना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
क्या है वेस्ट नाइल वायरस?
वेस्ट नाइल वायरस मुख्य रूप से संक्रमित क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलता है। यह वायरस पहले पक्षियों में फैलता है और फिर मच्छरों के जरिए इंसानों तक पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सामान्य संपर्क से नहीं फैलता।
बुजुर्गों, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में इस वायरस से गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक होता है।
ब्रेन में सूजन का बढ़ सकता है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लगभग 80 प्रतिशत संक्रमित लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण विकसित होते हैं, उनमें तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, थकान और त्वचा पर चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
गंभीर मामलों में वायरस मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित कर सकता है, जिससे एन्सेफलाइटिस (ब्रेन में सूजन), मेनिन्जाइटिस और एक्यूट फ्लेसीड पैरालिसिस जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मरीजों को चलने-फिरने में दिक्कत, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, मानसिक भ्रम, बेहोशी और आईसीयू तक की जरूरत पड़ सकती है।
यूरोप में बढ़ रहे हैं मामले
22 जुलाई तक ग्रीस में वेस्ट नाइल वायरस संक्रमण के 21 स्थानीय मामले दर्ज किए गए। इनमें से 20 मरीजों में सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर समस्याएं पाई गईं। कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, हालांकि अब तक किसी मौत की पुष्टि नहीं हुई है।
कैसे करें बचाव?
डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने से बचाव करना है।
पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं।
घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
रात में मच्छरदानी का उपयोग करें।
बुखार या न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान मच्छरों से बचाव को हल्के में न लें। समय रहते सावधानी बरतने से डेंगू, मलेरिया के साथ-साथ वेस्ट नाइल वायरस जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।