नेपाल - चीन सीमा के करीब ग्लेशियर टूटने के बाद आई फ्लैश फ्लड ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को उजागर किया है। इस घटना को जलवायु परिवर्तन से जुड़े बढ़ते खतरों से जोड़ते हुए संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण गंभीर जोखिम का सामना कर रहा है।
वर्षों से चेतावनी दे रहे वैज्ञानिक
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा कि वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों की ओर से हिंदू कुश हिमालय को लेकर लंबे समय से चेतावियां दी जाती रही हैं।
उनके मुताबिक, इस क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए बदलती जलवायु के प्रभावों को नजरअंदाज करना बेहद गंभीर परिणाम दे सकता है। नेपाल में ग्लेशियर टूटने और उसके बाद आई बाढ़ की घटना इसी खतरे की एक भयावह तस्वीर पेश करती है।
जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से बढ़ रहा तापमान
स्टील ने जलवायु परिवर्तन के पीछे मानवीय गतिविधियों को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में बड़े पैमाने पर कोयला, तेल और गैस जलाने से वातावरण का तापमान लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण चरम मौसम की घटनाओं के अधिक बार होने और उनकी तीव्रता बढ़ने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव केवल हिमालय तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं।
कमजोर समुदायों पर सबसे ज्यादा असर
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख ने कहा कि जलवायु से जुड़ी आपदाओं का सबसे गंभीर प्रभाव अक्सर उन समुदायों पर पड़ता है, जो पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में ऐसे लोगों के पास नुकसान से निपटने और तेजी से सामान्य स्थिति में लौटने के संसाधन सीमित होते हैं। इसलिए जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में संवेदनशील समुदायों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
समाधान के लिए नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर
साइमन स्टील ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के रास्ते स्पष्ट हैं। दुनिया को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ना होगा।इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश भी बढ़ाना जरूरी है। बेहतर आपदा प्रबंधन, मजबूत बुनियादी ढांचा और समय रहते चेतावनी देने वाली व्यवस्थाएं नुकसान को कम करने में मदद कर सकती हैं।
हिमालयी क्षेत्र के लिए बढ़ती चुनौती
नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्र में बदलते पर्यावरणीय जोखिमों पर फिर से ध्यान केंद्रित किया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से सामने आई चिंता बताती है कि ग्लेशियर, जल संसाधन और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों की चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए जलवायु अनुकूलन और आपदा तैयारी पर तेजी से काम करना आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण होगा।