स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए पैदल चलना सबसे सरल, सुलभ और प्रभावी उपायों में से एक माना जाता है। यह हृदय, फेफड़ों, मांसपेशियों और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। नियमित रूप से चलने से वजन नियंत्रण, मधुमेह प्रबंधन, रक्तचाप संतुलन और तनाव कम करने जैसे कई लाभ मिलते हैं। लेकिन हालिया शोध बताते हैं कि केवल चलना ही नहीं, बल्कि चलने की गति भी स्वास्थ्य और संभावित जीवनकाल पर प्रभाव डाल सकती है।
तेज चलने वालों की उम्र क्यों हो सकती है अधिक?
ब्रिटेन के लीसेस्टर बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं ने लगभग 4.75 लाख लोगों की चलने की आदतों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग स्वयं को तेज गति से चलने वाला बताते हैं, उनकी संभावित जीवन प्रत्याशा धीमी गति से चलने वालों की तुलना में अधिक होती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह संबंध केवल शरीर के वजन से नहीं बल्कि व्यक्ति की समग्र शारीरिक सक्रियता से जुड़ा हुआ है। परिणामों ने संकेत दिया कि सक्रिय जीवनशैली रखने वाले लोगों का स्वास्थ्य अपेक्षाकृत बेहतर रहता है और वे उम्र बढ़ने के प्रभावों का सामना अधिक प्रभावी ढंग से कर पाते हैं।
केवल वजन नहीं, सक्रियता है असली पैमाना
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर टॉम येट्स के अनुसार, किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य और संभावित उम्र का आकलन करने में केवल शरीर का वजन पर्याप्त संकेतक नहीं है। शारीरिक सक्रियता और फिटनेस का स्तर कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शोध में यह भी पाया गया कि अत्यधिक कम वजन वाले और धीमी गति से चलने वाले लोगों में जीवन प्रत्याशा अपेक्षाकृत कम देखी गई। इससे यह संकेत मिलता है कि नियमित गतिविधि और बेहतर फिटनेस दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं।
टेलोमेयर का क्या है संबंध?
एक अन्य शोध में वैज्ञानिकों ने तेज चलने और लंबी उम्र के बीच जैविक संबंध को समझने का प्रयास किया। अध्ययन में पाया गया कि तेज गति से चलने वाले लोगों के ल्यूकोसाइट टेलोमेयर अपेक्षाकृत लंबे होते हैं। टेलोमेयर हमारे गुणसूत्रों के सिरों पर मौजूद सुरक्षात्मक संरचनाएं होती हैं, जो कोशिकाओं को क्षति से बचाने में मदद करती हैं। उम्र बढ़ने के साथ ये धीरे-धीरे छोटे होते जाते हैं। लंबे टेलोमेयर को जैविक रूप से कम उम्र और बेहतर स्वास्थ्य का संकेत माना जाता है।
टेलोमेयर क्यों हैं महत्वपूर्ण?
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार टेलोमेयर की लंबाई और दीर्घायु के बीच गहरा संबंध पाया गया है। लंबे टेलोमेयर वाले लोगों में उम्र से संबंधित कई बीमारियों का जोखिम कम देखा गया है। यही कारण है कि टेलोमेयर को जैविक उम्र का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, विशेष रूप से तेज गति से चलना, टेलोमेयर की लंबाई को बनाए रखने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
तेज चलने के अन्य स्वास्थ्य लाभ
तेज चाल से चलने से हृदय गति नियंत्रित रूप से बढ़ती है, जिससे हृदय और रक्तवाहिनियां अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करती हैं। इससे रक्त संचार बेहतर होता है, कैलोरी अधिक खर्च होती है और मांसपेशियों की कार्यक्षमता में सुधार आता है। नियमित ब्रिस्क वॉक तनाव कम करने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने और नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाने में भी मददगार मानी जाती है। विशेषज्ञ सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देते हैं, जिसमें तेज चाल से पैदल चलना भी शामिल है।
कितनी तेज होनी चाहिए चाल?
विशेषज्ञों के अनुसार तेज चलने का अर्थ दौड़ना नहीं है। ऐसी गति, जिसमें चलते समय सांस थोड़ी तेज हो जाए लेकिन बातचीत करना संभव रहे, सामान्यतः ब्रिस्क वॉकिंग मानी जाती है। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और फिटनेस स्तर के अनुसार उपयुक्त गति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी नई व्यायाम दिनचर्या की शुरुआत से पहले आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर रहता है।