उच्च रक्तचाप को अक्सर केवल नमक के सेवन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ अब इस धारणा को अधूरा मानते हैं। शरीर में ब्लड प्रेशर का संतुलन कई जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है, जिनमें मेटाबॉलिक बैलेंस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। केवल नमक कम करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संपूर्ण आहार और जीवनशैली को समझना जरूरी है।
विशेषज्ञ ने शुगर को बताया बड़ा कारक
25 वर्षों के अनुभव वाले हृदय शल्य चिकित्सक डॉ. जेरेमी लंदन ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि ब्लड प्रेशर को प्रभावित करने में शुगर और रक्त ग्लूकोज स्तर की भी अहम भूमिका होती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उनके अनुसार केवल नमक को दोष देना समस्या की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
अधिक शुगर का शरीर पर प्रभाव
जब व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में शुगर या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन करता है, तो शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शरीर अधिक मात्रा में इंसुलिन बनाता है। बार-बार ऐसा होने पर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के संकेतों के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे एक गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा
इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना कम कर देती हैं। परिणामस्वरूप ब्लड शुगर और इंसुलिन दोनों का स्तर लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है, जो धीरे-धीरे हृदय और रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। यही प्रक्रिया उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ा सकती है।
हृदय स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर
लगातार बढ़े हुए शुगर और इंसुलिन स्तर शरीर के मेटाबॉलिक संतुलन को बिगाड़ देते हैं, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना मुश्किल बना देती है। इसलिए शुगर का अत्यधिक सेवन लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
संतुलित आहार की आवश्यकता
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए केवल नमक ही नहीं, बल्कि शुगर और कुल आहार संतुलन पर भी ध्यान देना जरूरी है। ताजे और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन, रिफाइंड शुगर से दूरी और नियमित शारीरिक गतिविधि इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
जागरूकता ही बचाव का उपाय
आज के समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बीच यह आवश्यक हो गया है कि लोग अपनी खानपान की आदतों के प्रति जागरूक रहें। नमक के साथ-साथ शुगर के सेवन को भी नियंत्रित करना ही स्वस्थ जीवन की दिशा में सही कदम माना जा रहा है।