प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में कई बड़े कदम उठाए हैं। 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' जैसे अभियानों ने देशभर में स्थानीय उत्पादों और छोटे उद्योगों को नई पहचान दी है। इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश भी तेजी से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना और GI टैग के जरिए स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका असर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है।
MSME बना मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़
मध्य प्रदेश में इस समय 24 लाख से अधिक MSME इकाइयां सक्रिय हैं, जो सवा करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। राज्य सरकार की MSME विकास नीति-2025 और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए उद्यमियों को वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन और स्किल डेवलपमेंट का लाभ दिया जा रहा है। 31 मार्च 2026 तक राज्य सरकार की ओर से 600 से ज्यादा MSME इकाइयों को 375 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। इससे प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
ODOP योजना से हर जिले को मिली नई पहचान
'एक जिला-एक उत्पाद' योजना के तहत मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले के विशेष उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। धार का बाग प्रिंट, रीवा का सुंदरजा आम, मुरैना की गजक, चंदेरी साड़ी, बुरहानपुर का केला, बड़वानी का अदरक और बालाघाट का चिन्नौर चावल जैसे उत्पाद आज देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। राज्य सरकार उज्जैन में 284 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है, जहां ODOP उत्पादों को बड़ा मंच मिलेगा।
GI टैग से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान
मध्य प्रदेश के 26 उत्पादों को GI टैग मिल चुका है। इससे इन उत्पादों की प्रामाणिकता बढ़ी है और नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिली है। GI टैग मिलने के बाद स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और किसानों को बेहतर कीमत मिलने लगी है। साथ ही निर्यात की संभावनाओं को भी नई गति मिली है।
महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समुदाय को मिल रहा लाभ
सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समुदायों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। 'मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना' जैसी पहल के जरिए युवाओं को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी बन सकें।
'वोकल फॉर लोकल' से आगे बढ़कर 'ग्लोबल फॉर लोकल' की ओर बढ़ रहा MP
प्रदेश में रेडीमेड गारमेंट, फर्नीचर और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में आधुनिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में रोजगार और निवेश दोनों में वृद्धि की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि MSME, ODOP और GI टैग का यह मॉडल मध्य प्रदेश की ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है और राज्य को देश के सबसे तेजी से आत्मनिर्भर बनने वाले राज्यों की सूची में शामिल कर रहा है।
मध्य प्रदेश के विकास मॉडल की बड़ी बातें