भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन देश के सबसे बड़े आनुवंशिक रोग जांच अभियानों में से एक बनकर उभरा है। इस मिशन का उद्देश्य वर्ष 2047 तक सिकल सेल रोग के प्रभाव को कम करना, समय पर पहचान सुनिश्चित करना तथा प्रभावित लोगों को बेहतर उपचार और परामर्श उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में देश के 17 जनजातीय बहुल राज्यों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक 7.27 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। इस व्यापक परीक्षण अभियान ने यह स्पष्ट किया है कि सिकल सेल रोग कुछ विशेष भौगोलिक और जनजातीय क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक व्यापक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर हुई जांच भविष्य की स्वास्थ्य नीति, संसाधनों के बेहतर आवंटन और लक्षित उपचार कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी।
2.49 लाख मरीज और 20 लाख से अधिक वाहकों की पहचान
जांच अभियान के दौरान कुल 2,49,167 व्यक्तियों में सिकल सेल रोग की पुष्टि हुई है, जबकि 20,47,145 लोगों को इस रोग का वाहक (कैरियर) पाया गया है। वाहक वे व्यक्ति होते हैं जिनमें रोग का आनुवंशिक गुण मौजूद रहता है, लेकिन वे स्वयं गंभीर रूप से बीमार नहीं भी हो सकते। हालांकि यदि दोनों अभिभावक वाहक हों, तो उनकी संतान में सिकल सेल रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार वाहकों की समय पर पहचान भविष्य में इस आनुवंशिक बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी कारण मिशन के अंतर्गत केवल रोगियों की पहचान ही नहीं, बल्कि आनुवंशिक परामर्श, जागरूकता और परिवार आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।
मध्य प्रदेश और ओडिशा में सबसे अधिक मरीज
राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार देश में चिन्हित कुल सिकल सेल रोगियों में लगभग 59.28 प्रतिशत मरीज केवल दो राज्यों—ओडिशा और मध्य प्रदेश—से हैं। ओडिशा में सर्वाधिक 1,06,969 मरीजों की पहचान हुई है, जबकि मध्य प्रदेश में 40,741 रोगी चिन्हित किए गए हैं। इसके बाद गुजरात में 30,548 और महाराष्ट्र में 30,017 मरीज पाए गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन राज्यों के अनेक जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बना हुआ है। आनुवंशिक कारणों, सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता की कमी के कारण यह रोग कई परिवारों को पीढ़ियों से प्रभावित करता रहा है। व्यापक स्क्रीनिंग अभियान के बाद अब इन क्षेत्रों में उपचार और परामर्श सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जांच अभियान में छत्तीसगढ़ सबसे आगे
यदि परीक्षण की संख्या की बात करें तो छत्तीसगढ़ ने सबसे अधिक लोगों की जांच कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राज्य में अब तक 1.78 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें 28,384 व्यक्तियों में सिकल सेल रोग की पुष्टि हुई है।
मध्य प्रदेश भी जांच अभियान में प्रमुख राज्यों में शामिल है, जहां 1.33 करोड़ से अधिक लोगों का परीक्षण किया गया। इनमें 2,45,024 व्यक्तियों को इस रोग का वाहक पाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहकों की पहचान भविष्य में रोग नियंत्रण की रणनीति तैयार करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। समय रहते परामर्श और चिकित्सकीय निगरानी से आने वाली पीढ़ियों में इस आनुवंशिक बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
क्या है सिकल सेल रोग और क्यों है यह गंभीर?
सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कणिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिया (सिकल) के आकार की हो जाती हैं। इन असामान्य कोशिकाओं के कारण शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित हो सकता है, जिससे तेज दर्द, बार-बार संक्रमण, रक्ताल्पता, अंगों को नुकसान तथा अन्य गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
यह रोग जन्म से ही आनुवंशिक रूप से मौजूद होता है और वर्तमान में इसका स्थायी उपचार सीमित है। इसलिए समय पर जांच, नियमित चिकित्सा, संक्रमण से बचाव, पर्याप्त पोषण और आनुवंशिक परामर्श को इसके प्रभावी प्रबंधन का आधार माना जाता है। विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर देते हैं कि विवाह पूर्व या परिवार नियोजन के दौरान आनुवंशिक परामर्श इस रोग के प्रसार को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डिजिटल निगरानी से मजबूत हो रहा स्वास्थ्य अभियान
राष्ट्रीय सिकल सेल पोर्टल के माध्यम से इस पूरे अभियान की डिजिटल निगरानी की जा रही है। इससे लाभार्थियों का पंजीकरण, जांच परिणाम, उपचार की स्थिति और अनुवर्ती निगरानी जैसी प्रक्रियाओं को एकीकृत किया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को विभिन्न राज्यों के आंकड़ों का वास्तविक समय में विश्लेषण करने और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने में भी सुविधा मिल रही है।
सरकार का उद्देश्य केवल रोगियों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समय पर उपचार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक दवाएं और विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराना भी है। डिजिटल व्यवस्था से भविष्य में रोग नियंत्रण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
जागरूकता और समय पर जांच से ही संभव है प्रभावी नियंत्रण
विशेषज्ञों का मानना है कि सिकल सेल रोग के विरुद्ध सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता और समय पर जांच है। विशेषकर जनजातीय बहुल क्षेत्रों में लोगों को इस आनुवंशिक बीमारी, इसके लक्षणों, उपचार और वाहक होने के महत्व के बारे में जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। प्रारंभिक पहचान से रोगियों को बेहतर चिकित्सा मिल सकती है और भविष्य में रोग के प्रसार को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के अब तक के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि देश में इस रोग का वास्तविक भार अनुमान से कहीं अधिक व्यापक है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर स्क्रीनिंग, वैज्ञानिक अनुसंधान, सामुदायिक भागीदारी और मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान संभव होगा।