उज्जैन की धरती से निकली निकिता पोरवाल अब अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता के सबसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। वर्ष 2024 में फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड का खिताब जीतकर मध्य प्रदेश के लिए इतिहास रचने वाली निकिता अब 73वीं मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में देश की दावेदारी पेश करेंगी। प्रतियोगिता का भव्य अंतिम चरण 5 सितंबर 2026 को वियतनाम में आयोजित किया जाएगा, जहां दुनिया के करीब 120 देशों की प्रतिभागियां प्रतिष्ठित ताज के लिए मुकाबला करेंगी।
निकिता की यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि उनका परिचय केवल एक सौंदर्य प्रतियोगिता विजेता के रूप में नहीं है। अभिनय, रंगमंच, लेखन और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उनकी बहुआयामी पहचान ने उन्हें अन्य प्रतिभागियों से अलग स्थान दिया है। मिस वर्ल्ड के मंच पर सुंदरता के साथ प्रतिभा, व्यक्तित्व, सामाजिक दृष्टिकोण और उद्देश्य को भी महत्व दिया जाता है और निकिता की अब तक की यात्रा इन सभी पहलुओं का मेल दिखाई देती है।
मध्य प्रदेश की पहली मिस इंडिया बनने का गौरव
मुंबई में आयोजित फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2024 प्रतियोगिता में निकिता ने विजेता का ताज अपने नाम किया था। इस उपलब्धि के साथ वह मध्य प्रदेश से यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली प्रतिभागी बनीं। उनकी जीत ने उज्जैन के साथ-साथ पूरे प्रदेश में उत्साह पैदा किया और इसके बाद से ही उनकी नजर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने पर केंद्रित रही।
मिस इंडिया का ताज जीतने के बाद निकिता ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए लंबे समय तक तैयारी की। ऐसे आयोजनों में प्रतिभागियों को केवल बाहरी व्यक्तित्व के आधार पर नहीं परखा जाता, बल्कि मंच पर संवाद क्षमता, आत्मविश्वास, बौद्धिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक समझ और सामाजिक उद्देश्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निकिता की रंगमंच और लेखन की पृष्ठभूमि उन्हें इन क्षेत्रों में विशेष अनुभव प्रदान करती है।
आठ साल की उम्र में लिखी पहली किताब
निकिता की रचनात्मक यात्रा बेहद कम उम्र में शुरू हो गई थी। बताया जाता है कि उन्होंने महज आठ वर्ष की उम्र में अपनी पहली किताब लिखी थी। इसके बाद उनकी साहित्यिक रुचि आगे बढ़ती गई और उन्होंने लगभग 350 पन्नों का नाटक ‘कृष्णा लीला’ भी लिखा। यह रचनात्मकता उनके व्यक्तित्व के उस पक्ष को सामने लाती है, जो उन्हें सामान्य सौंदर्य प्रतियोगिता प्रतिभागी से कहीं अधिक व्यापक पहचान देता है।
लेखन के साथ निकिता ने रंगमंच को भी अपनी अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया। वह अब तक 60 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुकी हैं और रंगरेज थिएटर कंपनी में रचनात्मक निर्देशक के रूप में युवा कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने का काम भी करती हैं। इस अनुभव ने उन्हें अभिनय के साथ-साथ निर्देशन, प्रस्तुति और सामूहिक रचनात्मकता की गहरी समझ दी है।
मंच से लेकर शास्त्रीय कलाओं तक बहुआयामी प्रतिभा
निकिता का कला संसार केवल अभिनय और लेखन तक सीमित नहीं है। उन्होंने परफॉर्मिंग आर्ट्स में स्नातक की शिक्षा हासिल की है और शास्त्रीय नृत्य, कविता, हारमोनियम तथा बांसुरी जैसी विधाओं में भी उनकी रुचि और दक्षता बताई जाती है। उनकी कला यात्रा में भारतीय संस्कृति और रंगमंच की मजबूत छाप दिखाई देती है।
बड़े मंच पर प्रस्तुति देने का उनका अनुभव भी काफी व्यापक है। वह करीब 10 हजार दर्शकों के सामने रामलीला में माता सीता की भूमिका निभा चुकी हैं। इतने बड़े दर्शक समूह के सामने मंच पर चरित्र को जीवंत करना उनके आत्मविश्वास, संवाद क्षमता और अभिनय कौशल का परिचायक है। यही मंचीय अनुभव अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उनके लिए महत्वपूर्ण ताकत साबित हो सकता है।
सुंदरता से आगे सामाजिक सरोकारों पर जोर
मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता का ‘ब्यूटी विद ए पर्पज’ दृष्टिकोण प्रतिभागियों के सामाजिक सरोकारों को भी महत्व देता है। निकिता ने इसी भावना के अनुरूप आदिवासी महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों को अपने सामाजिक कार्यों का केंद्र बनाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छ पेयजल जैसे बुनियादी विषयों पर काम करके वह उन समुदायों तक विकास की पहुंच बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं, जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते आए हैं।
निकिता के सामाजिक प्रयासों में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि विकास और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर चलना आवश्यक है। इस दृष्टिकोण के कारण उनकी सामाजिक पहल केवल सहायता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सांस्कृतिक पहचान जैसे व्यापक मुद्दों को जोड़ती है।
वियतनाम में भारत की सांस्कृतिक पहचान भी होगी साथ
वियतनाम में होने वाली मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता निकिता के लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने का मंच नहीं होगी। वह भारत की सांस्कृतिक विविधता, परंपरा और आधुनिक सोच को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेंगी। ऐसे आयोजनों में प्रतिभागियों का व्यक्तित्व उनके देश की सामाजिक और सांस्कृतिक छवि से भी जुड़ जाता है, इसलिए निकिता की रंगमंचीय पृष्ठभूमि और भारतीय कलाओं से उनका जुड़ाव विशेष महत्व रखता है।
भारत की ओर से विश्व मंच पर उतरते समय उनके सामने 120 देशों की प्रतिभागियों की चुनौती होगी। प्रतियोगिता के अंतिम परिणाम का फैसला विभिन्न चरणों में प्रतिभागियों के प्रदर्शन, व्यक्तित्व, संवाद कौशल, प्रतिभा और सामाजिक दृष्टिकोण के आधार पर होगा। निकिता की बहुआयामी तैयारी उन्हें इस प्रतिस्पर्धा में मजबूत दावेदार के रूप में प्रस्तुत करती है।
5 सितंबर को होगा ताज के लिए निर्णायक मुकाबला
अब निकिता की नजर 5 सितंबर 2026 को होने वाले भव्य अंतिम चरण पर है। वियतनाम में आयोजित होने वाली 73वीं मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में दुनिया भर की प्रतिभागियां एक ही मंच पर अपने देशों का प्रतिनिधित्व करेंगी। भारत के लिए निकिता की मौजूदगी इस प्रतियोगिता को देश के दर्शकों के लिए भी खास बनाएगी।
उज्जैन से शुरू हुई उनकी यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुकी है। यदि निकिता विश्व सुंदरी का ताज हासिल करने में सफल होती हैं तो यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की सबसे बड़ी सफलता होगी, बल्कि मध्य प्रदेश और भारत के लिए भी गौरव का अवसर बनेगी। फिलहाल महाकाल की नगरी की यह बेटी पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर तिरंगा लहराने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।