जबलपुर। ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को बड़ा झटका दिया है। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मृतका के व्हाट्सएप संदेशों, सीसीटीवी फुटेज और लंबित फॉरेंसिक रिपोर्ट को अहम मानते हुए कहा कि मामले में अभी और जांच की जरूरत है। कोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए इस स्तर पर गिरिबाला सिंह को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की गिरिबाला सिंह की जमानत?
न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने 26 अक्टूबर को पारित आदेश में जमानत याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि ट्विशा शर्मा की मौत से पहले की परिस्थितियों, परिजनों के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों की भूमिका की विस्तार से जांच जरूरी है। गौरतलब है कि गिरिबाला सिंह 2 जून 2026 से जेल में हैं। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।
व्हाट्सएप संदेशों में ट्विशा ने बयां किया था दर्द
हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा की मां और ननद के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत को अपने आदेश में महत्वपूर्ण माना। अदालत के अनुसार, 9 मई को भेजे गए संदेशों में ट्विशा ने पति द्वारा बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाने और गर्भपात को लेकर आरोप लगाने की शिकायत की थी। इन संदेशों में उसने मानसिक रूप से परेशान होने और आत्महत्या जैसे विचार आने की बात भी कही थी। वहीं, 11 मई को उसने ससुराल में घुटन महसूस होने और प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी।
मौत से पहले मां से मांगे थे 3 हजार रुपये
अदालत के सामने आए तथ्यों के मुताबिक, 12 मई को ट्विशा शर्मा ने अपनी मां से 3 हजार रुपये मंगाए थे। इन पैसों से उसने नसीराबाद लौटने के लिए ट्रेन का टिकट बुक किया था। उसने पति के साथ वैवाहिक परामर्श के लिए डॉक्टर के पास जाने की बात भी कही थी। इसी रात करीब 9:20 बजे ट्विशा ने अपनी ननद को फोन किया था। इस दौरान वह रो रही थी और उसने पति के आक्रामक व्यवहार की शिकायत की थी। इसके बाद रात 9:36 बजे उसने एक संदेश भेजा, जिसमें उसे शांति से मरने देने की बात कही गई थी। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इसके बाद भी ट्विशा ने अपने माता-पिता से फोन पर बातचीत की थी और पति के कथित हिंसक व्यवहार के बारे में बताया था।
CCTV फुटेज में सामने आईं अहम गतिविधियां
हाईकोर्ट ने घर के सीसीटीवी फुटेज का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, रात करीब 10:23 बजे गिरिबाला सिंह पहली मंजिल से छत की ओर जाती दिखाई दी थीं। उनके पीछे उनका बेटा समर्थ भी छत पर गया था। कुछ समय बाद गिरिबाला सिंह नीचे आकर मुख्य दरवाजा खोलती दिखाई दीं। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज में समर्थ सिंह, उसके चचेरे भाई स्वराज सिंह और घरेलू सहायक प्रमोद कुमार झारिया मृतका को सीढ़ियों से नीचे लाते हुए नजर आए। अदालत ने इन घटनाक्रमों को मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना है।
आईफोन और CCTV रिकॉर्डर की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
मामले में अभी कुछ महत्वपूर्ण फॉरेंसिक रिपोर्ट आना बाकी है। मृतका के आईफोन से डेटा निकालने की रिपोर्ट जांच एजेंसियों को प्राप्त नहीं हुई थी। इसके अलावा घर के सीसीटीवी रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और निरंतरता की जांच के लिए रिकॉर्डर का डेटा केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) भेजा गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इन रिपोर्टों से मामले में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। यदि सीसीटीवी रिकॉर्ड में किसी तरह के बदलाव या छेड़छाड़ की बात सामने आती है, तो आगे की जांच की आवश्यकता होगी।
आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी थी कि आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध में स्पष्ट इरादा होना जरूरी है। केवल प्रताड़ना के आरोपों के आधार पर इस अपराध को साबित नहीं किया जा सकता। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के मौजूदा तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इरादे के सवाल को अन्य साक्ष्यों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। अदालत ने माना कि मामले के तथ्य पहले उद्धृत किए गए फैसले से अलग हैं और आरोपियों की भूमिका की आगे जांच करना जरूरी है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी।