केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीकानेर में सीमा सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सीमा सुरक्षा बल (BSF), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), राजस्थान पुलिस तथा अन्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। पाकिस्तान सीमा से लगे पांच जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचे को और अधिक मजबूत बनाना तथा उभरती चुनौतियों का समन्वित समाधान तैयार करना था।
घुसपैठ और नशीले पदार्थों की तस्करी पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, ड्रग्स तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया गया। गृह मंत्री ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि सीमा क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को अत्याधुनिक बनाया जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझाकरण और समन्वय बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया ताकि किसी भी खतरे का समय रहते जवाब दिया जा सके।
सीमा से 15 किलोमीटर क्षेत्र में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
अमित शाह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भारत-पाकिस्तान सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी अनधिकृत ढांचों की तत्काल पहचान कर उन्हें हटाया जाए, जिनसे सुरक्षा व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो सकता है। सरकार का मानना है कि अवैध निर्माणों का उपयोग कई बार तस्करी, घुसपैठ और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
साइबर अपराध और आर्थिक नेटवर्क पर भी होगी कार्रवाई
नई सुरक्षा रणनीति केवल भौतिक सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। बैठक में साइबर अपराध, अवैध वित्तीय लेन-देन और संगठित अपराध नेटवर्क पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारियों को शेल कंपनियों, संदिग्ध बैंक खातों और तथाकथित ‘म्यूल अकाउंट्स’ के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं। इन खातों का उपयोग अक्सर साइबर ठगी, हवाला कारोबार और अवैध वित्तपोषण के लिए किया जाता है।
संयुक्त सीमा प्रबंधन तंत्र होगा और मजबूत
गृह मंत्री ने BSF और राज्य एजेंसियों को संयुक्त सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत और अधिक प्रभावी ढंग से काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, तकनीकी निगरानी और जमीनी स्तर पर समन्वय को मजबूत किए बिना सीमा सुरक्षा को पूरी तरह प्रभावी नहीं बनाया जा सकता। इसी उद्देश्य से विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर जोर दिया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देने की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान की लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखते हुए यह 360 डिग्री सुरक्षा योजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। घुसपैठ, ड्रग्स नेटवर्क, साइबर अपराध और अवैध आर्थिक गतिविधियों के खिलाफ एकीकृत रणनीति अपनाकर सरकार सीमा क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित और संगठित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।