नई दिल्ली - भारतीय सेना को नया नेतृत्व मिल गया है। जनरल धीरज सेठ ने भारत के 31वें थल सेना प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया। पद संभालते ही उन्होंने इसे अपने लिए गर्व और विनम्रता का क्षण बताया और देश की सेवा में समर्पित रहने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि का संकल्प
पदभार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में जनरल सेठ ने कहा कि वे “कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि” के आदर्शों के साथ इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हैं।इसके साथ ही उन्होंने आगे अपने इस संबोधन में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन पर भरोसा कर यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया, जिसके लिए वे आभारी हैं।
शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि
जनरल सेठ ने देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उन वीर जवानों का साहस, कर्तव्यनिष्ठा और निस्वार्थ समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने इसे भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
भारतीय सेना की क्षमता और तैयारी पर जोर
नए थल सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना एक युद्ध-तैयार और अनुभवी बल है, जो हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना को लगातार आधुनिक बनाना समय की आवश्यकता है।
आधुनिक तकनीक से लैस सेना बनाने का लक्ष्य
जनरल सेठ ने कहा कि उनका उद्देश्य एक ऐसी सेना तैयार करना है जो तकनीकी रूप से उन्नत, भविष्य के लिए तैयार और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस में सक्षम हो। उन्होंने रक्षा मंत्री द्वारा दिए गए “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” के मार्गदर्शन को आधार बताते हुए कहा कि भारतीय सेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाना उनकी प्राथमिकता होगी।
भविष्य की रणनीति पर फोकस
थल सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में संकेत दिया कि आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना देश की सुरक्षा के हर मोर्चे पर पूरी तरह सक्षम और सतर्क है और रहेगी।