भारतीय रंगमंच और सिनेमा की दिग्गज हस्ती विजया मेहता के निधन पर देशभर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।
पीएम मोदी बोले- भारतीय संस्कृति की महान हस्ती थीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि विजया मेहता भारतीय संस्कृति और सिनेमा की सबसे महान हस्तियों में हमेशा याद की जाएंगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक मराठी रंगमंच की अग्रणी हस्ती के रूप में विजया मेहता अपनी रचनात्मकता और कला के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती थीं। उनके कार्यों ने कई पीढ़ियों के कलाकारों, निर्देशकों और रंगमंच प्रेमियों को प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार, प्रशंसकों और पूरे कला जगत के प्रति संवेदना व्यक्त की।
नितिन गडकरी ने बताया अपूरणीय क्षति
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विजया मेहता ने अपने नाटकों और फिल्मों के माध्यम से मराठी रंगमंच और सिनेमा को अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने मराठी थिएटर में नई क्रांति लाने के साथ अनेक कलाकारों को मंच प्रदान किया। गडकरी ने उनके निधन को मराठी रंगमंच और फिल्म जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
देवेंद्र फडणवीस ने कहा- एक युग का अंत
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने शोक संदेश में कहा कि विजया मेहता ने अभिनय और निर्देशन दोनों क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने कई यादगार नाटकों का निर्देशन किया और अनेक प्रतिभाशाली रंगकर्मियों को तैयार किया। फिल्मों में निभाए गए उनके किरदार भी हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके निधन के साथ भारतीय रंगमंच का एक स्वर्णिम दौर समाप्त हो गया।
सुनेत्रा पवार ने बताया प्रेरणास्रोत
डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने कहा कि विजया मेहता ने निर्देशन और रंगमंच निर्माण के क्षेत्र में नई दिशा दी। उन्होंने उत्कृष्ट नाटकों का निर्माण किया और युवा कलाकारों को आगे बढ़ने का अवसर दिया। फिल्मों में भी उनके प्रभावशाली अभिनय ने अलग पहचान बनाई। उनके अनुसार, विजया मेहता का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
आधुनिक भारतीय रंगमंच की अग्रणी हस्ती थीं विजया मेहता
4 नवंबर 1934 को जन्मीं विजया मेहता भारतीय थिएटर और सिनेमा की प्रतिष्ठित निर्देशक, अभिनेत्री और निर्माता थीं। कला जगत में उन्हें स्नेहपूर्वक "बाई" कहा जाता था। उन्होंने आधुनिक भारतीय रंगमंच को नई पहचान दिलाने और प्रदर्शन कला को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से भारतीय कला और संस्कृति जगत ने अपनी एक महान हस्ती को खो दिया।