नई दिल्ली - भारत और चीन के बीच सीमा तनाव और सैन्य तैनाती को लेकर एक बार फिर महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि दोनों देशों के संबंधों में हाल के समय में कुछ सकारात्मक प्रगति जरूर हुई है, लेकिन वास्तविक स्थिरता का आधार केवल बातचीत नहीं बल्कि मजबूत सैन्य क्षमता और सतर्कता है।
भारत-चीन संबंधों में संवाद के संकेत
सेना प्रमुख ने संकेत दिया कि चीन के साथ संवाद की प्रक्रिया धीरे-धीरे बेहतर हो रही है और दोनों देश सीमा पर शांति बनाए रखने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भरोसा केवल उम्मीदों पर नहीं, बल्कि ठोस सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतिक तैयारी पर आधारित होना चाहिए। उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना उत्तरी सीमा पर पूरी तरह सतर्क और तैनात है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में सुरक्षा बलों की मौजूदगी जरूरी है, क्योंकि सीमाई हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
तैनाती में बदलाव का भविष्य बातचीत पर निर्भर
सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ता है और हालात और अधिक अनुकूल होते हैं, तो सीमा पर तैनाती के पैटर्न में बदलाव पर विचार किया जा सकता है। लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह परिस्थितियों और आपसी समझ पर निर्भर होगी। उन्होंने आधुनिक युद्ध रणनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के वैश्विक संघर्षों और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे उदाहरणों से यह साफ हो गया है कि तकनीक ने युद्ध की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है। ड्रोन, साइबर तकनीक और आधुनिक हथियारों ने सैन्य रणनीति को नया रूप दिया है।
सैनिकों की भूमिका हमेशा जरूरी
हालांकि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि भारत जैसे विविध भौगोलिक और सुरक्षा चुनौतियों वाले देश में सैनिकों की भूमिका कभी खत्म नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर सैनिकों की उपस्थिति और अनुभव अब भी सबसे महत्वपूर्ण है। उनके बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रही है, लेकिन भारत अपनी सुरक्षा रणनीति में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतने के मूड में नहीं है।