असम में जुलाई के दौरान आई भीषण बाढ़ से बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को बताया कि अब तक किए गए नुकसान के आकलन में 26,681 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि हुई है। बाढ़ ने केवल आवासीय ढांचे को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि पशुधन, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों पर भी व्यापक असर पड़ा है। सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण अभी जारी है, जिसके पूरी तरह पूरा होने के बाद नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
चार जिलों में शुरू हुई राहत की दूसरी किस्त
मुख्यमंत्री ने शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में प्रभावित लोगों के लिए तत्काल अंतरिम आर्थिक सहायता की दूसरी किस्त जारी की। इसके तहत पात्र प्रभावित परिवारों को 15 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। सरकार का कहना है कि राहत राशि का उद्देश्य बाढ़ से तत्काल प्रभावित परिवारों को शुरुआती आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने घरों और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े नुकसान से उबरने की प्रक्रिया शुरू कर सकें। राहत वितरण के साथ-साथ सरकार नुकसान का सत्यापन भी आगे बढ़ा रही है।
104 लोगों की जा चुकी है जान
असम में इस साल बाढ़ की स्थिति ने मानवीय स्तर पर भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब तक बाढ़ से 104 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 18,887 पशुशालाओं के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। घरेलू पशुओं की संख्या में भी भारी नुकसान दर्ज किया गया है और अब तक 5,98,691 पशुओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इससे ग्रामीण और कृषि आधारित परिवारों के सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है।
किसानों और बुनकरों पर भी पड़ा बड़ा असर
बाढ़ से असम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से कृषि और हथकरघा क्षेत्र को भी भारी नुकसान हुआ है। सरकारी आकलन में अब तक 93,256 प्रभावित किसानों की पहचान की गई है। इसके अलावा करीब 41 हजार हथकरघा संबंधी सामग्रियों के नष्ट होने की जानकारी मिली है। असम के ग्रामीण इलाकों में हथकरघा और कृषि लाखों परिवारों की आय से जुड़े हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में हुआ नुकसान केवल तत्काल संपत्ति के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले महीनों में परिवारों की आमदनी पर भी इसका असर पड़ सकता है।
अगस्त के अंत तक पहले चरण का सर्वे पूरा होने की उम्मीद
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि नुकसान का पहला चरण वाला सर्वेक्षण 28 या 29 अगस्त तक पूरा होने की उम्मीद है। सर्वेक्षण में सामने आए प्रभावित परिवारों और उनके नुकसान का विवरण एक वेब पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके जरिए प्रभावित लोग यह जांच सकेंगे कि उनका नाम सूची में शामिल है या नहीं और उनके नुकसान का आकलन किस तरह किया गया है। सरकार का उद्देश्य राहत प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और प्रभावित परिवारों को अपने रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध कराना है।
शिकायतों के बाद सितंबर में होगा दूसरा सर्वे
सरकार के अनुसार पहले सर्वेक्षण के बाद प्रभावित परिवारों को अपने नुकसान से संबंधित शिकायत या सुझाव दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इन शिकायतों और आपत्तियों के आधार पर करीब 10 सितंबर से सर्वेक्षण का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। दूसरे चरण में सामने आने वाली जानकारियों को 15 सितंबर तक अद्यतन करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी सर्वेक्षण प्रक्रिया सितंबर के मध्य तक समाप्त होने की उम्मीद है, जिसके बाद राहत और पुनर्वास से जुड़े प्रयासों को और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
राहत के साथ पुनर्वास की चुनौती भी बड़ी
असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ केवल तत्काल राहत की चुनौती नहीं है, बल्कि यह लंबे समय तक पुनर्वास और आजीविका बहाली की समस्या भी पैदा करती है। इस बार हजारों घरों, पशुशालाओं, कृषि गतिविधियों और हथकरघा सामग्री को नुकसान पहुंचने से प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन में लौटने में समय लग सकता है। ऐसे में राहत राशि के साथ क्षतिग्रस्त आवासों की मरम्मत, किसानों की आजीविका बहाली और पशुधन से हुए नुकसान की भरपाई जैसे कदम भी महत्वपूर्ण होंगे। सरकार के आगामी सर्वेक्षण और राहत प्रक्रिया से यह तय करने में मदद मिलेगी कि वास्तविक नुकसान के आधार पर सहायता किस स्तर तक पहुंचाई जा सकती है।