गुवाहाटी: असम में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने सोमवार को विधानसभा में ‘असम समान नागरिक संहिता 2026 विधेयक’ पेश कर दिया। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला तीसरा बीजेपी शासित राज्य बन गया है।
विधानसभा में पेश हुआ UCC बिल
संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से यह विधेयक सदन में पेश किया। इससे पहले राज्य कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी थी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राज्य में समान नागरिक व्यवस्था लागू करना और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देना है।
बहुविवाह पर रोक और लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
विधेयक में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप यानी सह जीवनसाथी संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य बनाने की बात भी कही गई है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि यह कानून असम में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगा।
बीजेपी ने कहा- इसी सत्र में होगा पास
बीजेपी विधायक विश्वजीत डिमरी ने कहा कि सरकार इस बिल को मौजूदा सत्र में ही पास कराने की तैयारी में है। उन्होंने कहा, “यह बिल इसी सत्र में पारित होगा और इसके बाद पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।”
हिमंत बिस्वा सरमा पहले ही दे चुके थे संकेत
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इससे पहले 13 मई को ही घोषणा कर दी थी कि राज्य सरकार 25 मई को विधानसभा में UCC बिल पेश करेगी। उन्होंने कहा था कि असम सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने के अपने संकल्प पर कायम है और उन्हें भरोसा है कि यह विधेयक सदन से पारित हो जाएगा।
विपक्ष ने किया विरोध
वहीं विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने सभी समुदायों और संगठनों से व्यापक चर्चा किए बिना बिल पेश किया है। असम कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जाकिर हुसैन सिकदर ने कहा कि UCC बीजेपी का राजनीतिक एजेंडा है और इससे आम जनता को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े फैसले से पहले सभी पक्षों से चर्चा होनी चाहिए थी।