भाटपाड़ा: उत्तर 24 बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस द्वारा संचालित नगर पालिकाओं में पार्षदों के इस्तीफे का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। कांचरापाड़ा और हालीशहर के बाद अब भाटपाड़ा नगर पालिका में भी बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पालिका के 29 पार्षदों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का मन बना लिया है। गुरुवार को सभी पार्षदों ने अपना इस्तीफा पत्र तैयार कर ईओ को सौंप दिया।
पालिका में ‘अचलावस्था’, सेवाओं पर असर का आरोप
भाटपाड़ा नगर पालिका के वाइस चेयरमैन देवज्योति घोष ने बताया कि नगर पालिका में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकों को मिलने वाली जरूरी सेवाओं में लगातार बाधा आ रही है और पालिका में लगभग अचलावस्था की स्थिति बनी हुई है। घोष के मुताबिक,चेयरपर्सन की अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को स्थिति से अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा।
आज SDM को सौंपा जा सकता है इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार, तैयार किए गए इस्तीफा पत्र को आज एसडीएम को सौंपा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो भाटपाड़ा नगर पालिका में प्रशासनिक संकट और गहरा सकता है।
35 वार्डों में से 29 पार्षदों का बड़ा फैसला
गौरतलब है कि भाटपाड़ा नगर पालिका में कुल 35 वार्ड हैं। इनमें से 2 पार्षदों का निधन हो चुका है। बाकी बचे 33 पार्षदों में से 29 ने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है, जो नगर पालिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
गारुलिया पालिका में भी बढ़ सकती है हलचल
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो कांचरापाड़ा, हालीशहर और भाटपाड़ा के बाद अब गारुलिया नगर पालिका में भी तृणमूल पार्षद इस्तीफे की राह पर चल सकते हैं। इलाके में नगर पालिकाओं की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ने की चर्चा है।
अर्जुन सिंह बोले- नागरिक सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक अर्जुन सिंह ने कहा क्षेत्र के नागरिकों को मिलने वाली जरूरी सेवाएं किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में राज्य सरकार से बात कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पालिका संकट पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
भाटपाड़ा नगर पालिका में एक साथ 29 पार्षदों के इस्तीफे की तैयारी ने बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है और क्या अन्य नगर पालिकाओं में भी इसका असर देखने को मिलेगा।