नई दिल्ली। सीबीएसई की नई भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाएं अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई करने का आश्वासन दिया है।
CBSE की नई भाषा नीति पर विवाद
सीबीएसई की नई नीति के तहत नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू किया जाना प्रस्तावित है। इसी फैसले के खिलाफ छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार
सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मामले का उल्लेख किया। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे। मुकुल रोहतगी ने इसे अत्यावश्यक जनहित याचिका बताते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगले सप्ताह मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा।
‘अचानक नई भाषा सीखना मुश्किल’
मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि अचानक इस तरह की नई व्यवस्था लागू करने से छात्रों और अभिभावकों में भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि कई छात्रों के लिए अचानक नई भाषा सीखना कठिन होगा और इससे पढ़ाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
छात्रों और अभिभावकों ने जताई चिंता
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई भाषा नीति लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी और संक्रमण अवधि दी जानी चाहिए थी। उनका तर्क है कि शैक्षणिक सत्र के बीच में इस तरह का बदलाव छात्रों के हित में नहीं है और इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।