सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) और किराये के मकानों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। दिल्ली सरकार जल्द ही PG नीति का मसौदा तैयार कर इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।शहरी विकास और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में PG और किराये के मकानों में रहने वाले विश्वविद्यालय के छात्रों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगले एक से दो महीने के भीतर नीति को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।
PG चलाने के लिए लाइसेंस होगा जरूरी
प्रस्तावित पेइंग गेस्ट आवास विनियमन एवं सुरक्षा विधेयक 2026 के तहत PG संचालन के लिए अनिवार्य लाइसेंस की व्यवस्था किए जाने की तैयारी है। यानी बिना निर्धारित नियमों और लाइसेंस के PG संचालित करना आसान नहीं होगा।सरकार का उद्देश्य PG आवासों में रहने वाले छात्रों को बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए नियमों के साथ निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किए जाने की बात कही गई है।
जोनवार किराया सीमा और सुरक्षा ऑडिट
नई नीति में सिर्फ लाइसेंस व्यवस्था ही नहीं, बल्कि किराये और सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए जाएंगे। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जोनवार किराया सीमा तय करने का प्रावधान होगा।इसके अलावा PG भवनों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट भी कराया जाएगा। इससे छात्रों को PG में रहने से पहले वहां मौजूद सुरक्षा इंतजामों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
केंद्रीय PG पोर्टल पर मिलेगी पूरी जानकारी
दिल्ली सरकार छात्रों की सुविधा के लिए एक केंद्रीय PG पोर्टल तैयार करने की योजना पर भी काम कर रही है। इस पोर्टल पर PG से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी।छात्र किसी PG में रहने का फैसला लेने से पहले वहां का किराया, उपलब्ध सुविधाएं और अग्नि सुरक्षा ऑडिट की स्थिति जैसी जानकारी देख सकेंगे। इससे छात्रों को PG चुनने में अधिक पारदर्शिता मिलने की उम्मीद है।
पहले से चल रहा था नीति पर काम
मंत्री आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार पहले से ही PG नीति और न्यायमूर्ति गौबा समिति की रिपोर्ट को लागू करने की दिशा में काम कर रही थी। सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार की सक्रियता और बढ़ गई है।
सरकारी इमारतों में हॉस्टल बनाने की भी तैयारी
PG व्यवस्था के साथ-साथ दिल्ली में छात्रों के लिए हॉस्टल की उपलब्धता बढ़ाने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। सरकार विश्वविद्यालयों के अलावा नरेला समेत खाली पड़ी सरकारी इमारतों का इस्तेमाल छात्रावास बनाने के लिए करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।इसका उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ निजी PG व्यवस्था पर निर्भरता को कम करने की दिशा में विकल्प तैयार करना है।
LG और CM की बैठक में भी हो चुकी है चर्चा
छात्र आवास और PG व्यवस्था से जुड़े मुद्दे पर दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक भी हो चुकी है। इसमें दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की संयुक्त अध्यक्षता में संबंधित विषयों पर चर्चा की गई थी।अब सरकार प्रस्तावित नीति का मसौदा तैयार कर उसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी में है।