नई दिल्ली. देश में सोने के बदले कर्ज लेने का चलन लगातार मजबूत होता जा रहा है। मार्च 2026 तक गोल्ड लोन की कुल बकाया राशि बढ़कर 18.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 50.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती सोने की कीमतें, आसान ऋण प्रक्रिया और त्वरित नकदी उपलब्धता ने गोल्ड लोन को आम लोगों और छोटे कारोबारियों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। यही वजह है कि यह देश के सबसे तेजी से विस्तार करने वाले ऋण क्षेत्रों में शामिल हो गया है।
दक्षिण भारत बना गोल्ड लोन का सबसे बड़ा केंद्र
देश के कुल गोल्ड लोन बाजार में दक्षिण भारतीय राज्यों का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कुल गोल्ड लोन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा केवल पांच राज्यों से आता है। इन राज्यों में लोगों के बीच सोने में निवेश की मजबूत परंपरा है और व्यापारिक गतिविधियों में भी सोने को वित्तीय सुरक्षा के रूप में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। इन पांच राज्यों में कुल गोल्ड लोन बकाया लगभग 13.94 लाख करोड़ रुपये बताया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
किन राज्यों में सबसे अधिक गिरवी रखा जा रहा सोना?
गोल्ड लोन के मामले में सबसे आगे दक्षिण भारत के राज्य हैं। आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु इस सूची में शीर्ष स्थान पर है, जहां लगभग 5.96 लाख करोड़ रुपये का गोल्ड लोन बकाया है। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 3.08 लाख करोड़ रुपये, कर्नाटक में 2.18 लाख करोड़ रुपये, तेलंगाना में 1.60 लाख करोड़ रुपये और केरल में 1.45 लाख करोड़ रुपये का गोल्ड लोन दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में सोने की सांस्कृतिक और आर्थिक महत्ता इस प्रवृत्ति का प्रमुख कारण है।
उत्तर और पश्चिम भारत में अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी
हालांकि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में भी गोल्ड लोन का विस्तार हो रहा है, लेकिन उनकी हिस्सेदारी अभी दक्षिण भारत की तुलना में काफी कम है। उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन का कुल आकार लगभग 42,300 करोड़ रुपये है। वहीं महाराष्ट्र में 1.11 लाख करोड़ रुपये, गुजरात में 57,100 करोड़ रुपये, राजस्थान में 41,700 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल में लगभग 35,000 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन दर्ज किया गया है। यह अंतर क्षेत्रीय आर्थिक व्यवहार और निवेश की परंपराओं को भी दर्शाता है।
बड़े टिकट लोन की मांग में तेजी
गोल्ड लोन बाजार में केवल ग्राहकों की संख्या ही नहीं बढ़ रही, बल्कि ऋण राशि का आकार भी लगातार बढ़ रहा है। विशेष रूप से 2.5 लाख रुपये से अधिक के गोल्ड लोन की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। चिकित्सा आपात स्थितियों, छोटे व्यवसायों के विस्तार, शिक्षा खर्च और घरेलू आवश्यकताओं के लिए लोग तेजी से गोल्ड लोन का सहारा ले रहे हैं। सोने के बढ़ते मूल्य के कारण लोगों को गिरवी रखे गए आभूषणों पर पहले की तुलना में अधिक ऋण राशि प्राप्त हो रही है।
बैंकों और एनबीएफसी के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा
गोल्ड लोन बाजार में सरकारी बैंकों की पकड़ अभी भी सबसे मजबूत बनी हुई है। हालांकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां भी छोटे और मध्यम श्रेणी के ऋणों में तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। आसान दस्तावेजी प्रक्रिया, तेज स्वीकृति और ग्राहकों तक व्यापक पहुंच के कारण एनबीएफसी इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि महंगाई, नकदी की बढ़ती जरूरत और सोने की ऊंची कीमतों के चलते आने वाले वर्षों में गोल्ड लोन बाजार और अधिक तेजी से बढ़ सकता है।
आर्थिक अनिश्चितता में बना भरोसेमंद विकल्प
वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना आज भी भारतीय परिवारों के लिए सबसे भरोसेमंद संपत्ति माना जाता है। यही कारण है कि जरूरत पड़ने पर लोग अन्य ऋण विकल्पों की तुलना में गोल्ड लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं। त्वरित प्रक्रिया, अपेक्षाकृत कम दस्तावेजी औपचारिकताएं और संपत्ति बेचने की आवश्यकता न होने के कारण गोल्ड लोन तेजी से लोकप्रिय वित्तीय साधन बनता जा रहा है।