नई दिल्ली. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार देश में मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर व्यापक रूप से सक्रिय हो गई हैं। दक्षिणी गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्र तथा दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बने ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से वातावरण में नमी लगातार बढ़ रही है। इसी प्रणाली के कारण उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के अनेक हिस्सों में व्यापक वर्षा दर्ज की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रणाली अगले कुछ दिनों तक सक्रिय रह सकती है, जिससे कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की स्थिति बनी रहने की संभावना है।
दिल्ली-एनसीआर में छह दिन तक बारिश के आसार
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद तथा अन्य क्षेत्रों में मानसून का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। लगातार हो रही वर्षा के कारण अनेक स्थानों पर जलभराव और यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी लगभग छह दिनों तक रुक-रुक कर वर्षा, गरज-चमक और बादलों का प्रभाव बना रह सकता है। कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा के साथ तेज हवाएं भी चलने की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन ने नागरिकों से जलभराव वाले मार्गों से बचने और मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर लगातार नजर रखने की अपील की है।
15 राज्यों में भारी वर्षा और वज्रपात की चेतावनी
मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, गुजरात और महाराष्ट्र सहित 15 राज्यों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी व्यक्त की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन तथा नदियों और नालों के जलस्तर में वृद्धि की संभावना बनी हुई है। वहीं मैदानी इलाकों में निचले क्षेत्रों में जलभराव और यातायात बाधित होने की आशंका जताई गई है।
दक्षिण भारत में भी तेज रहेगा मानसून का असर
मौसम विभाग के अनुसार केरल तथा दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में अगले दो से तीन दिनों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। लगातार वर्षा के कारण कुछ जिलों में जलभराव, नदी-नालों के उफान और भूस्खलन जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। पश्चिमी तट के अन्य क्षेत्रों में भी मानसून सक्रिय बना रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण भारत में हो रही व्यापक वर्षा जलाशयों के जलस्तर को बढ़ाने में सहायक हो सकती है, हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों में सावधानी बरतना आवश्यक है।
पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में बढ़ी निगरानी
असम सहित पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में लगातार वर्षा के कारण पहले से ही बाढ़ जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में अतिरिक्त वर्षा की संभावना व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर जैसे पर्वतीय राज्यों में भी भारी वर्षा के कारण भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा बना हुआ है। पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों से मौसम की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करने का आग्रह किया गया है।
मौसम विभाग ने नागरिकों को दी सतर्क रहने की सलाह
भारतीय मौसम विभाग ने भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों में न जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के सक्रिय चरण में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए लोगों को केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करना चाहिए। किसानों, यात्रियों और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों को भी मौसम की अद्यतन जानकारी के आधार पर अपनी गतिविधियों की योजना बनाने की सलाह दी गई है।