दिल्ली में बुधवार को इंडिया ब्लॉक की बड़ी बैठक होगी। इस बैठक से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दूरी बना ली है। पार्टी का कहना है कि वे राज्यसभा चुनाव की तैयारी में व्यस्त हैं। लेकिन राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि असली वजह कुछ और हो सकती है। अखिलेश यादव की अनुपस्थिति ने गठबंधन के अंदर की स्थिति को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। विपक्षी एकजुटता को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच यह दूरी और चर्चा का विषय बन गई है। सपा की व्यस्तता का हवाला दिया जा रहा है लेकिन कई पर्यवेक्षक इसे गठबंधन के समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।
डीएमके का रुख और बयान
डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि अखिलेश यादव के न आने से गठबंधन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि कई पार्टियां कांग्रेस के साथ सीधे खड़ी नहीं होना चाहतीं। कुछ दलों को कांग्रेस के साथ जाने में हिचक है। लेकिन इन सबकी सोच एक जैसी है। सबका मकसद भाजपा का विरोध करना है। इसलिए बैठक में खुद आना जरूरी नहीं है। एलंगोवन के मुताबिक हर पार्टी को पहले से पता है कि बैठक में कौन से मुद्दे होंगे। एजेंडा भी साफ है। ऐसे में बैठक में आना अब सिर्फ औपचारिकता बन गया है।
कांग्रेस के साथ हिचक
डीएमके प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कई पार्टियां कांग्रेस के साथ सीधे खड़ी होने में हिचक महसूस करती हैं। कुछ दलों ने कांग्रेस की रणनीति पर नाराजगी जताई है। तमिलनाडु में गठबंधन बदलने की भी आलोचना हुई है। इन वजहों से पूरा ब्लॉक एक मजबूत इकाई नहीं लग रहा। कई पार्टियां डीएमके को अपने साथ रखना चाहती हैं। गठबंधन के अंदर कांग्रेस की अगुवाई को लेकर अलग-अलग दल अलग रुख अपनाए हुए हैं। यह हिचक इंडिया ब्लॉक की एकजुटता पर सवाल खड़े करती है।
गठबंधन की स्थिरता पर सवाल
एलंगोवन ने कहा कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह स्थिर नहीं दिख रहा। कई पार्टियों ने पहले भी कांग्रेस का विरोध किया है। कुछ दलों ने कांग्रेस की रणनीति पर नाराजगी जताई है। इसलिए पूरा ब्लॉक एक मजबूत इकाई नहीं लग रहा। अखिलेश यादव की अनुपस्थिति ने इन सवालों को और हवा दी है। विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ एकजुटता का दावा करते हैं लेकिन आंतरिक मतभेद समय-समय पर सामने आते रहते हैं। बैठक से दूरी बनाने वाले फैसलों से गठबंधन की मजबूती पर चर्चा तेज हो गई है।
बैठक का एजेंडा और महत्व
एलंगोवन के मुताबिक हर पार्टी को पहले से पता है कि बैठक में कौन से मुद्दे होंगे। एजेंडा भी साफ है। ऐसे में बैठक में आना अब सिर्फ औपचारिकता बन गया है। असली बात विचारों और भाजपा के खिलाफ एकजुट विरोध की है न कि सिर्फ बैठक में मौजूद रहने की। दिल्ली में होने वाली इस बैठक में गठबंधन की रणनीति और आगामी चुनावों को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है। लेकिन प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति से बैठक के प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं। औपचारिकता से आगे बढ़कर ठोस एकजुटता की जरूरत बताई जा रही है।
भाजपा विरोध का साझा मकसद
डीएमके प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि सबकी सोच एक जैसी है और सबका मकसद भाजपा का विरोध करना है। इसलिए बैठक में खुद आना जरूरी नहीं है। विचारों की एकजुटता और भाजपा के खिलाफ साझा विरोध ही असली ताकत है। अखिलेश यादव की दूरी के बावजूद गठबंधन का लक्ष्य एक है। कई दल कांग्रेस के साथ सीधे समीकरण बनाने में हिचक रखते हुए भी भाजपा विरोध पर सहमत हैं। यह साझा मकसद ही इंडिया ब्लॉक को जोड़े रखने वाला प्रमुख कारक बताया जा रहा है। बैठक के नतीजे और आगे की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।