नई दिल्ली: अमेरिकी डॉलर ($) के मुकाबले भारतीय रुपये (₹) की कीमतों में आ रही लगातार गिरावट को लेकर देश के जाने-माने अर्थशास्त्री, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार को आश्वस्त करते हुए कहा है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत अगर 100 रुपये के स्तर को भी पार कर जाए, तो अतिरिक्त रूप से चिंतित होने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी राय साझा करते हुए अरविंद पनगढ़िया ने लिखा, “डॉलर के मुकाबले 100 रुपये प्रति डॉलर हो जाने की मनोवैज्ञानिक बाधा को हमारे नीतिगत फैसलों पर हावी नहीं होने देना चाहिए। 100 सिर्फ एक संख्या है, ठीक वैसे ही जैसे 99 या 101।”
इस साल एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में रुपया
मौजूदा साल भारतीय मुद्रा के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इस साल एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में भारतीय रुपया भी शामिल है। साल 2026 में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में करीब 6.6% की गिरावट आई है। हालांकि, लगातार 9 दिनों की गिरावट के बाद गुरुवार को भारतीय मुद्रा ने थोड़ी वापसी की। शुक्रवार को भी कोई बहुत बड़ी गिरावट नहीं देखी गई और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) 96.28 के स्तर पर दर्ज की गई।
पनगढ़िया का मानना है कि वैश्विक और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए रुपये का थोड़ा कमजोर होना बेहद स्वाभाविक है और यही सही रास्ता भी है। उन्होंने लिखा, “तेल की किल्लत चाहे कम समय के लिए हो या लंबे समय के लिए, इस समय सबसे सही फैसला यही होगा कि रुपये की कीमत को थोड़ा गिरने दिया जाए।” उन्होंने आगे समझाया कि अगर कच्चे तेल की किल्लत कुछ महीनों या एक साल जैसे कम समय के लिए है, तो तेल का आयात खर्च (इंपोर्ट कॉस्ट) घटते ही रुपये की कीमत फिर से मजबूती से वापसी कर लेगी।
रिजर्व फॉरेक्स फंड को झोंकना हो सकता है खतरनाक
पनगढ़िया ने आगाह किया है कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का संकट लंबे समय तक खिंचता है, तो बाजार में हस्तक्षेप करके जबरन रुपये की कीमत को थामने की कोशिश करना बेहद खतरनाक हो सकता है। उनके मुताबिक, रुपये को गिरने से बचाने के लिए अगर आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) का अंधाधुंध इस्तेमाल करेगा, तो एक समय ऐसा आएगा जब देश का फॉरेक्स रिजर्व ही खत्म हो सकता है।
वर्तमान में कई विशेषज्ञ और संगठन आरबीआई से मांग कर रहे हैं कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एनआरआई डिपॉजिट (NRI Deposits) पर ब्याज दरें बढ़ाई जाएं या फिर डॉलर बांड (Dollar Bonds) लाए जाएं। लेकिन पनगढ़िया ने ऐसे कदमों को लेकर भी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि डॉलर बांड या ज्यादा ब्याज वाले एनआरआई डिपॉजिट केवल कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं, लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं हैं। आखिरकार हमें 100 रुपये प्रति डॉलर की मनोवैज्ञानिक बाधा को पार करना ही होगा।
2013 के मुकाबले आज बेहद मजबूत है भारत: जून में बढ़ सकती है महंगाई दर
हालांकि, उन्होंने देश को आश्वस्त करते हुए यह भी कहा कि आज का भारत साल 2013 के भारत जैसा नहीं है। पनगढ़िया के अनुसार, “यह 2013 का समय नहीं है जब देश में महंगाई दर दो अंकों (Double Digit) में पहुंच गई थी। आज आरबीआई की सतर्क और कड़े वित्तीय नियंत्रण के कारण वैसी स्थिति नहीं है। इसलिए अगर रुपया गिरता भी है, तो महंगाई का थोड़ा दबाव जरूर आएगा, लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था उसे आसानी से संभालने में सक्षम है।”
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation Rate) मामूली रूप से बढ़कर 3.48% हो गई थी, जो अभी भी आरबीआई के 4% के तय लक्ष्य (Target) से नीचे ही है। हालांकि, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ा है। यही कारण है कि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जून महीने में होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में महंगाई के अनुमान को थोड़ा बढ़ाया जा सकता है।