नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के Oceansat-3 उपग्रह ने भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री उत्पादकता में उल्लेखनीय गिरावट के संकेत दर्ज किए हैं। हाल के महीनों में समुद्र की सतह पर क्लोरोफिल-ए की मात्रा कम हुई है, जो समुद्री जैविक गतिविधियों में बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
वैज्ञानिकों ने इस बदलाव को प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे El Nino से जोड़कर देखा है। खास बात यह है कि यह संकेत El Nino के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले ही उपग्रह से प्राप्त हुए हैं। इससे समुद्र की बदलती परिस्थितियों को अंतरिक्ष से समझने में नई जानकारी मिल सकती है।
El Nino से गर्म हो रहा भूमध्यरेखीय प्रशांत
El Nino भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की स्थिति है। समुद्र के तापमान में यह बदलाव केवल समुद्री वातावरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वायुमंडलीय हवाओं और समुद्री धाराओं के स्वरूप को भी प्रभावित कर सकता है।
El Nino की मजबूत स्थिति बनने पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसे कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी, लू, असामान्य वर्षा और कमजोर मानसूनी गतिविधियों जैसी परिस्थितियों से जोड़ा जाता है। हालांकि इसका प्रभाव हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता।
क्लोरोफिल-ए में गिरावट ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की नजर
ISRO के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), हैदराबाद ने Oceansat-3 से मिले आंकड़ों के आधार पर प्रशांत महासागर में क्लोरोफिल-ए का अध्ययन किया। क्लोरोफिल-ए समुद्री सूक्ष्म वनस्पतियों, खासकर फाइटोप्लवक, में पाया जाने वाला प्रमुख वर्णक है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अध्ययन में अप्रैल, मई और जून के दौरान 2023, 2024, 2025 और 2026 के आंकड़ों की तुलना की गई। इस तुलना से वैज्ञानिकों को अलग-अलग वर्षों में प्रशांत महासागर की समुद्री उत्पादकता और सतही परिस्थितियों में आए बदलावों को समझने का अवसर मिला।
2024 और 2025 में स्थिति सामान्य रही
उपग्रह से मिले आंकड़ों के अनुसार जून 2024 और जून 2025 में प्रशांत महासागर की परिस्थितियां ENSO के तटस्थ चरण के अनुरूप थीं। उस दौरान समुद्र की सतह पर क्लोरोफिल-ए का वितरण किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं दे रहा था।
लेकिन जून 2026 के आंकड़ों ने अलग तस्वीर दिखाई। विकसित हो रहे El Nino की परिस्थितियों के बीच सतही क्लोरोफिल-ए में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समुद्र की सतह का तापमान, हवाओं की दिशा और जैविक उत्पादकता एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
हवाओं की दिशा बदली, El Ninoके संकेत मजबूत
ISRO के विश्लेषण में समुद्र की सतह पर चलने वाली हवाओं के स्वरूप में भी बदलाव सामने आया। सामान्य परिस्थितियों में भूमध्यरेखीय प्रशांत में पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली हवाएं प्रमुख रहती हैं, लेकिन El Nino के दौरान इन हवाओं के कमजोर पड़ने या पश्चिमी हवाओं में बदलने की स्थिति बन सकती है।
अप्रैल से जून 2026 के दौरान क्लोरोफिल-ए वाले क्षेत्र का पश्चिम की ओर विस्तार भी सिकुड़ता दिखाई दिया। हवाओं के कमजोर होने और दिशा बदलने के साथ क्लोरोफिल-ए के क्षेत्र में यह कमी विकसित हो रहे El Nino की स्थिति को और समर्थन देती है।
समुद्री उत्पादकता घटने का क्या मतलब?
समुद्र की सतह पर क्लोरोफिल-ए की मात्रा में कमी समुद्री प्राथमिक उत्पादकता में गिरावट का संकेत हो सकती है। फाइटोप्लवक समुद्री खाद्य शृंखला की आधारभूत कड़ी होते हैं, इसलिए उनकी उपलब्धता में बदलाव का असर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि केवल क्लोरोफिल-ए में कमी के आधार पर समुद्री पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए समुद्र के तापमान, पोषक तत्वों, हवाओं, धाराओं और अन्य पर्यावरणीय संकेतकों का संयुक्त अध्ययन जरूरी है। Oceansat-3 से प्राप्त आंकड़े इस व्यापक निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
Oceansat-3 अंतरिक्ष से कर रहा समुद्र की निगरानी
2022 में प्रक्षेपित Oceansat-3, जिसे पृथ्वी अवलोकन प्रणाली EOS-06 के नाम से भी जाना जाता है, समुद्र और वायुमंडल से जुड़े विभिन्न मानकों की निगरानी के लिए विकसित किया गया है। इसमें Ocean Colour Monitor-3 और Scatterometer जैसे सेंसर लगे हैं, जो समुद्र की जैविक और भौतिक परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी जुटाते हैं।
इन उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों के जरिए वैज्ञानिक समुद्र की सतह के रंग, क्लोरोफिल-ए, हवाओं और अन्य परिस्थितियों में होने वाले बदलावों का अध्ययन कर सकते हैं। Nino जैसी वैश्विक मौसम प्रणाली को समझने में इस तरह की लगातार उपग्रह निगरानी खास महत्व रखती है।
आगे वैश्विक मौसम पर भी नजर
प्रशांत महासागर में El Niño का विकास केवल समुद्री वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय नहीं है। इसकी स्थिति मजबूत होने पर वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित हो सकता है, जिससे अलग-अलग महाद्वीपों में तापमान और वर्षा के स्वरूप में बदलाव संभव है।
Oceansat-3 के ताजा अवलोकन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे समुद्र के भीतर हो रहे बदलावों को शुरुआती चरण में पहचानने में मदद कर रहे हैं। आने वाले महीनों में समुद्री तापमान, हवाओं और क्लोरोफिल-ए के आंकड़ों पर नजर रखकर वैज्ञानिक यह बेहतर ढंग से समझ सकेंगे कि विकसित हो रहा El Niño किस दिशा में बढ़ रहा है और इसका वैश्विक मौसम पर कितना प्रभाव पड़ सकता है।