नई दिल्ली: लागत लेखा परीक्षा से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने के मामले में दिल्ली की विशेष अधिनियम अदालत ने एम/एस केमफ्लो पावर प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक विकाश झा को जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने 6 अगस्त 2026 को इस मामले में सजा का आदेश जारी किया।
लागत लेखा परीक्षक की नियुक्ति नहीं करने का मामला
यह मामला कंपनी की ओर से लागत लेखा परीक्षक की नियुक्ति नहीं करने और लागत लेखा परीक्षा रिपोर्ट दाखिल नहीं करने से जुड़ा है। अदालत ने 3 जुलाई 2026 के अपने फैसले में कंपनी और उसके निदेशक विकाश झा को कंपनी अधिनियम, 2013 की संबंधित धाराओं के उल्लंघन का दोषी माना था।
अभियोजन पक्ष ने मांगी कड़ी सजा
सजा की अवधि तय करने को लेकर हुई सुनवाई के दौरान कंपनी अभियोजक ने दोषियों के खिलाफ अधिकतम सजा और जुर्माना लगाने की मांग की। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि कंपनी ने जानबूझकर लागत लेखा परीक्षक की नियुक्ति नहीं की और लागत लेखा परीक्षा रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की।
सौरभ मिश्रा और बृजलाल बेलवाल रहे मौजूद
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से कंपनी अभियोजक सौरभ मिश्रा और बृजलाल बेलवाल अदालत में मौजूद रहे। अदालत के आदेश में दोनों की उपस्थिति दर्ज की गई है।
बचाव पक्ष ने सजा में नरमी की मांग की
दोषी पक्ष की ओर से अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की गई। बचाव पक्ष ने कहा कि विकाश झा पहली बार दोषी पाए गए हैं और इस मामले में उनकी ओर से अपराध करने की कोई गलत मंशा नहीं थी। अदालत के सामने यह भी बताया गया कि वह अपने परिवार और दो बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हैं और परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं।
कंपनी पर 50 हजार, निदेशक पर 25 हजार रुपये जुर्माना
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने एम/एस केमफ्लो पावर प्राइवेट लिमिटेड पर 50 हजार रुपये और निदेशक विकाश झा पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना जमा नहीं करने पर एक महीने की साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
30 दिन के भीतर जमा करनी होगी जुर्माने की राशि
अदालत ने दोनों दोषियों को जुर्माने की राशि 30 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है। जुर्माना जमा करने के लिए मामले की अगली तारीख 11 सितंबर 2026 तय की गई है।